Delhi : दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने यूएपीए मामले में जेल में बंद शरजील इमाम को अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है।✍️अरविंद कुमार
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Delhi : दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने यूएपीए मामले में जेल में बंद शरजील इमाम को अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने यह राहत सीमित अवधि के लिए मंजूर की है। वहीं, शरजील की नियमित जमानत से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
शरजील इमाम को यह अंतरिम राहत दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने दी है। अदालत ने उन्हें 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी है। शरजील ने अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, शादी के कार्यक्रम दिल्ली और बिहार में होने हैं।
यह नियमित जमानत नहीं है। अदालत से मांगी गई राहत का उद्देश्य केवल पारिवारिक समारोह में शामिल होना है। 10 अक्टूबर को अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद शरजील इमाम को अदालत के आदेश और निर्धारित शर्तों के मुताबिक वापस जेल लौटना होगा।
शरजील इमाम फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े कथित व्यापक साजिश मामले में आरोपी हैं। इस मामले में उन पर यूएपीए समेत कई धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। जुलाई 2026 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उस आदेश को चुनौती देने वाली शरजील की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।
शरजील इमाम की नियमित जमानत का मामला अलग कार्यवाही में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने 21 सितंबर को सुनवाई 30 सितंबर तक स्थगित कर दी थी। दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया था कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू स्वास्थ्य कारणों से उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने मामले को 30 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।
इससे पहले मार्च 2026 में भी कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को 20 मार्च से 30 मार्च तक 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। उस समय राहत का उद्देश्य छोटे भाई की शादी में शामिल होना और अपनी बीमार मां की देखभाल करना बताया गया था।
मार्च में दी गई अंतरिम जमानत के दौरान अदालत ने शरजील पर कई शर्तें लगाई थीं। उन्हें 50 हजार रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा अंतरिम जमानत की अवधि में मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाई गई थी।
इस बार मिली राहत को नियमित जमानत से अलग समझना जरूरी है। 4 से 10 अक्टूबर तक की अंतरिम जमानत केवल शादी में शामिल होने के लिए है, जबकि शरजील इमाम की नियमित जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट में 30 सितंबर को सुनवाई होनी है। इसलिए फिलहाल उनके मामले में नियमित जमानत का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
✍️अरविंद कुमार
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