Delhi : दिल्ली में इमारत गिरने के हादसे कोई नई बात नहीं हैं, जब भी राजधानी में कोई जर्जर या कमजोर इमारत भरभराकर गिरती है तो कुछ ही पलों में मौके पर चीख-पुकार, अफरा-तफरी और अपनों को मलबे में तलाशते लोगों की दर्दनाक तस्वीरें सामने आ जाती हैं। हर साल मानसून के दौरान जर्जर मकानों, कमजोर ढांचों, अवैध निर्माण और निर्माणाधीन इमारतों को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।
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ताजा मामला दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन का है, जहां रविवार दोपहर करीब 1 बजे एक पांच मंजिला पीजी इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में 6 छात्रों समेत 7 लोगों की मौत की बात सामने आई है। मौत के आंकड़े बढ़ भी सकता है। इनमें एक मजदूर भी शामिल है। अब तक 15 लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम की तलाश के लिए 10 टीमें बनाई हैं। इन टीमों में स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अलग-अलग ऑपरेशन यूनिट के पुलिसकर्मी शामिल हैं। टीमों की निगरानी एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस दिल्ली और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
सत्य निकेतन हादसा दिल्ली में इमारत गिरने का पहला मामला नहीं है। पिछले करीब दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में जर्जर ढांचे, अवैध रूप से बनाई गई अतिरिक्त मंजिलें, कमजोर नींव और बिना सुरक्षा इंतजाम के खुदाई लगातार जानलेवा साबित होती रही है।
2006 से 2026 तक के प्रमुख हादसे
विश्वास नगर, शाहदरा – 2006
दिसंबर 2006 में शाहदरा के विश्वास नगर में एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। मलबे में मजदूरों और लोगों के दबे होने की सूचना के बाद बड़ा बचाव अभियान चलाया गया। इस हादसे में मौत का आंकड़ा उपलब्ध रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसे कुल मौतों में जोड़ना उचित नहीं होगा।
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उत्तम नगर – 2007
फरवरी 2007 में पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में निर्माणाधीन ढांचा गिर गया। हादसे में 4 मजदूरों की मौत हुई।
नांगलोई – 2009
जून 2009 में नांगलोई में वेल्डिंग की दुकान में एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के बाद इमारत का हिस्सा ढह गया। हादसे में 5 लोगों की मौत और 9 लोग घायल हुए।
ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर – 2010
15 नवंबर 2010 को पूर्वी दिल्ली के ललिता पार्क इलाके में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। यह दिल्ली के सबसे भयावह भवन हादसों में शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों में मौत का आंकड़ा 67 से 71 के बीच दर्ज हुआ है, जबकि 65 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिलों और भवन की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल उठे।
चांदनी महल – 2011
सितंबर 2011 में चांदनी महल इलाके में पास के प्लॉट में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के बेसमेंट की खुदाई की जा रही थी। इससे सटी हुई पुरानी चार मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई।
करोल बाग – 2012
2012 में करोल बाग इलाके में भवन गिरने की घटना में 4 लोगों की मौत हुई। बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में नगर निकाय की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए थे।
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इंद्रलोक – 2014
2014 में इंद्रलोक इलाके में इमारत गिरने से 10 लोगों की मौत हुई। यह हादसा भी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल बना।
सदर बाजार – 2014
इसी साल सदर बाजार इलाके में हुए दो अलग-अलग भवन हादसों में क्रमशः 2 और 3 लोगों की मौत हुई।
उत्तम नगर – 2016
2016 में उत्तम नगर में दो मंजिला मकान गिरने से एक महिला और उसके दो बच्चों समेत 3 लोगों की मौत हुई।
तैमूर नगर – 2017
नवंबर 2017 में तैमूर नगर में करीब 45 साल पुरानी इमारत ढह गई। हादसे के समय मरम्मत का काम चल रहा था। इसमें 2 लोगों की मौत हुई।
सावन पार्क, अशोक विहार – 2018
2018 में सावन पार्क, अशोक विहार में चार मंजिला इमारत गिरने से 5 लोगों की मौत हुई। इसके बाद अगले ही दिन अशोक विहार में एक अन्य पांच मंजिला इमारत ढह गई, जिसमें 7 लोगों की मौत और 5 लोग घायल हुए। इस मामले में नगर निगम ने 2 इंजीनियरों को निलंबित किया और 1 संविदा कर्मचारी को हटाया।
मोती नगर – 2019
2019 में मोती नगर की एक फैक्ट्री में विस्फोट के बाद इमारत ढह गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई।
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समयपुर बादली और नरेला – 2019
इसी साल समयपुर बादली में मकान गिरने से 1 महिला की मौत, जबकि नरेला में दुकान गिरने से 1 युवक की मौत हुई।
सब्जी मंडी, मलका गंज – 2021
सितंबर 2021 में उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी इलाके में करीब 70 साल पुरानी तीन मंजिला जर्जर इमारत ढह गई। हादसे में 2 बच्चों की मौत हुई।
मुस्तफाबाद – 2022
जुलाई 2022 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद में करीब 20 साल पुरानी तीन मंजिला जर्जर इमारत गिर गई। हादसे में 1 व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।
सत्य निकेतन – 2022
सत्य निकेतन इलाके में 2022 में भी मरम्मत के दौरान भवन हादसा हुआ था। इसमें 2 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया था।
सैदुलाजाब, साकेत – 2026
2026 में सैदुलाजाब इलाके में बहुमंजिला इमारत के हिस्से के गिरने से 6 लोगों की मौत हुई। हादसे के बाद अवैध निर्माण और भवन पर बढ़े अतिरिक्त भार को लेकर सवाल उठे।
रोहिणी सेक्टर-16-2026
लगातार बारिश के दौरान रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत का ढांचा गिर गया। हादसे में 3 लोगों की मौत हुई।
सत्य निकेतन 2026
अब दक्षिण-पश्चिम दिल्ली का सत्य निकेतन हादसा सामने आया है। करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला पीजी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे में 6 छात्रों समेत 7 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। पुलिस ने मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए 10 पुलिस टीमें लगाई गई हैं।
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26 साल 106 मौतों का दावा कितना सही?
मीडिया रिपोर्टों में 2000 से 2026 के बीच जर्जर ढांचे, अवैध मंजिलों, कमजोर नींव और बिना सुरक्षा खुदाई जैसी वजहों से दिल्ली में 106 लोगों की मौत का आंकड़ा बताया गया है। हालांकि अलग-अलग स्रोतों में घटनाओं की सूची और मौतों की संख्या अलग-अलग मिलती है। इसलिए 106 को अंतिम आधिकारिक कुल आंकड़ा मानने से पहले MCD, दिल्ली सरकार और NCRB के रिकॉर्ड से मिलान जरूरी है।
MCD के सामने सबसे बड़ा सवाल
दिल्ली में निर्माण के लिए Unified Building Bye-Laws 2016 समेत कई नियम लागू हैं। MCD को अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का अधिकार है। खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए समय-समय पर सर्वे भी कराए जाते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि अगर कोई इमारत जर्जर है, अतिरिक्त मंजिलें बिना अनुमति बनाई गई हैं या किसी भवन में अवैध निर्माण हो रहा है, तो हादसा होने से पहले कार्रवाई क्यों नहीं होती?
दिल्ली की पुरानी बस्तियों, पुनर्वास कॉलोनियों और छात्र इलाकों में छोटे प्लॉटों पर बहुमंजिला निर्माण को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई जगह 50-60 वर्ग गज के प्लॉट पर 5 से 6 मंजिल तक निर्माण किए जाने के आरोप सामने आते हैं। छात्रों और किरायेदारों से 12 से 18 हजार रुपये प्रति बेड तक वसूले जाने की बात भी सामने आती है, लेकिन इमारतों की मरम्मत, सीपेज, दरार और सुरक्षा व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
सवाल सिर्फ बिल्डिंग बायलॉज का नहीं है। सवाल है कि नियम कौन तोड़ रहा है, निगरानी कौन कर रहा है और कार्रवाई हादसे से पहले क्यों नहीं हो रही? क्योंकि दिल्ली में हर ढहती इमारत सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं गिराती। वह प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल छोड़ जाती है।
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