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न्यायिक फैसलों का विकल्प नहीं बन सकती AI, अंतिम निर्णय इंसानी न्यायाधीश लें: न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) न्यायिक प्रशासन को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की बड़ी क्षमता रखती है, लेकिन न्याय करने की जिम्मेदारी केवल मानव न्यायाधीशों के पास ही रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के मूल्यों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संवेदनशीलता, निष्पक्षता और मानवीय विवेक की जगह कोई मशीन नहीं ले सकती।

By HO BUREAU 

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ब्रसेल्स में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) न्यायिक प्रशासन को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की बड़ी क्षमता रखती है, लेकिन न्याय करने की जिम्मेदारी केवल मानव न्यायाधीशों के पास ही रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के मूल्यों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संवेदनशीलता, निष्पक्षता और मानवीय विवेक की जगह कोई मशीन नहीं ले सकती। इसलिए AI को केवल सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक निर्णय या कानून के शासन के विकल्प के रूप में।

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह

न्यायमूर्ति सिंह ने ये बातें ब्रसेल्स स्थित सेंटर फॉर इंडो-यूरोपियन कोऑपरेशन (CIEC) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संवाद “न्यायिक कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की भूमिका” को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहीं। सम्मेलन में भारत और यूरोप के न्यायाधीशों, राजनयिकों, विधि विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत की विकसित होती न्यायिक AI प्रणाली का उल्लेख करते हुए SUPACE, SUVAS, TERES और LegRAA जैसी पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालतों में AI के उपयोग के दौरान जवाबदेही, पारदर्शिता, स्पष्ट व्याख्या, निजता की सुरक्षा और प्रभावी मानवीय निगरानी हर स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। तकनीकी नवाचार को अपनाना जरूरी है, लेकिन इससे संवैधानिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास प्रभावित नहीं होना चाहिए।

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भविष्य के विधि पेशेवरों को AI आधारित न्याय प्रणाली के लिए तैयार करना आवश्यक है: प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा

सम्मेलन में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा ने भी न्यायिक कार्यप्रणाली में AI और मशीन लर्निंग की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भविष्य के विधि पेशेवरों को AI आधारित न्याय प्रणाली के लिए तैयार करना आवश्यक है, लेकिन तकनीक का उपयोग हमेशा संवैधानिक सिद्धांतों और नैतिक शासन के अनुरूप होना चाहिए।

कार्यक्रम में CIEC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कौशिक, भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी आसिम अनवर, CEPA की वरिष्ठ शोधकर्ता अंडा बोलोगा, CPRG के निदेशक डॉ. रामानंद सहित भारत और यूरोप के अनेक विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में एल्गोरिदमिक जवाबदेही, न्यायिक पारदर्शिता, डिजिटल न्याय, निजता की सुरक्षा और AI के जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई। अंत में सभी प्रतिभागियों ने न्यायिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, शोध संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाकर न्याय प्रणाली में AI के सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक उपयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

 

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