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दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड 6000 मेगावाट, कई पावर प्लांट्स में सिर्फ एक दिन कोयला – सत्येंद्र जैन

कोयले की कमी के कारण दिल्ली को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार पत्रकार वार्ता कर पूरे देश कोयले की बहुत कमी है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली , 29 अप्रैल। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर कहा कि पूरे देश में कोयले की बहुत भयंकर कमी है। इसका सबसे बड़ा कारण, रेलवे के रैक का कम होना और कोयले की कम सप्लाई होना। कोयले की इस भारी कमी के कारण देशभर के सभी पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन को लेकर समस्या आ रही है।

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सत्येंद्र जैन ने पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिजली को स्टोर नहीं किया जा सकता है, बिजली रोजाना पावर प्लांट में बनाई जाती है। इसलिए बिजली के बैकअप के लिए इसे बनाने वाले ईंधन का बैकअप रखना जरूरी है। इस समय यह ईंधन कोयला है, जिसकी सप्लाई में देशभर में कमी आई हुई है।

पावर प्लांट्स में कोयले की कमी

सत्येंद्र जैन ने बताया कि आम तौर पर पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए 21 दिनों से ज्यादा का कोयले का बैकअप होता है। लेकिन आज देश के कई प्लांट्स में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है। दिल्ली में भी स्थिति गंभीर है। दिल्ली को बिजली मुहैया कराने वाले सभी पावर प्लांट में एक ही दिन का कोयला बचा है। वर्तमान में सप्लाई के हिसाब से हमारे पास केवल अगले दिन का कोयला बचा होता है।

बिजली के पावर प्लांट इस तरह काम नहीं कर सकते है। किसी भी परिस्थिति में कम से कम सात दिनों का कोयला होना ही चाहिए, ताकि पावर प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर काम कर सकें। अभी दिल्ली में 6000 मेगावाट की पीक डिमांड है। इसकी जानकारी पॉवर के ऑनलाइन पोर्टल पर देख सकते हैं। लगभग 21 दिनों से ज्यादा का बैकअप हमेशा ही सभी पावर प्लांट्स में हुआ रहा करता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह सिर्फ 1-2 दिन का रह गया है।

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बिजली की गंभीर समस्या को लेकर केंद्र सरकार जल्द उचित कदम उठाए

सत्येंद्र जैन ने कहा कि कोयले की सप्लाई करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। केंद्र सरकार से अपील हैं कि देश भर में कोयले की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करें। साथ ही रेलवे के रैक बढ़ाएं जाएं। जहां पहले ट्रेन में 450 रैक होते थे अब केवल 405 ही हैं। जबकि इनकी संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, परंतु इसका ठीक उलट हो रहा है। अब ये रैक घट गए हैं।

दिल्ली के कुछ हिस्सों में ब्लैक आउट से बचने के लिए और डीएमआरसी, अस्पतालों और आगामी गर्मी के मौसम में बिजली की निरंतर आपूर्ति के लिए इन पॉवर स्टेशनों की अहम भूमिका रहती है। अभी तक दिल्ली सरकार इस पूरे मामले को मैनेज किए हुए हैं। लेकिन पूरे देश की स्थिति की गंभीरता को देखकर केंद्र सरकार को इसपर जल्द से जल्द उचित कदम उठाना चाहिए। ताकि बिजली की समस्या का समाधान निकालना हो सके।

दिल्ली सरकार लगातार स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है

राजधानी के लोगों को बिजली के संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए दिल्ली सरकार स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं और हरसंभव प्रयास कर रही है। वर्तमान में कोयले की कमी से जूझ रहे इन पॉवर स्टेशन के जरिए दिल्ली में 25 प्रतिशत से 30 प्रतिशत की बिजली की मांग को पूरा किया जा रहा हैं। दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाले विभिन्न थर्मल स्टेशनों में इस समय कोयले की बहुत ज्यादा कमी है।

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नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरशन (एनटीपीसी) के दादरी-II और झज्जर (अरावली), दोनों पॉवर प्लांट्स मुख्य रूप से दिल्ली में बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए स्थापित किए गए थे। लेकिन इन पॉवर प्लांट्स में कोयले का बेहद कम स्टॉक बचा है। केंद्र सरकार की ओऱ से वक़्त रहते कदम नहीं उठाया गया तो दिल्ली मेट्रो व अस्पतालों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति में दिक्कत आ सकती है।

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