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नालंदा विश्वविद्यालय में ‘चिंतन शिविर’: अल्पसंख्यक कल्याण में डिजिटल पहल

By HO BUREAU 

Updated Date

Digital initiatives at Nalanda University

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 18 से 19 फरवरी 2026 तक बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह आयोजन अल्पसंख्यक कल्याण नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई, जो अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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आयोजन का नेतृत्व

इस महत्वपूर्ण आयोजन का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री, तथा केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने किया। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया और अल्पसंख्यक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

निगरानी ऐप की शुरुआत

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना के तहत निगरानी डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया। यह ऐप बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वास्तविक समय निगरानी को सक्षम बनाता है और पारदर्शिता को बढ़ाता है। इससे परियोजनाओं के कार्यान्वयन में जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। अधिकारी और नागरिक दोनों परियोजनाओं की प्रगति को ट्रैक कर सकेंगे, जिससे समय पर पूर्णता सुनिश्चित होगी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित चैटबॉट

सेवा वितरण को बेहतर बनाने, सूचना तक पहुंच प्रदान करने और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ नागरिक जुड़ाव को सुधारने के लिए एआई-संचालित चैटबॉट पेश किए गए। ये चैटबॉट विभिन्न योजनाओं, पात्रता मानदंडों और आवेदन प्रक्रियाओं के बारे में त्वरित और सटीक जानकारी प्रदान करेंगे। यह पहल डिजिटल युग में सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

हज रिस्ट बैंड का अनावरण

हज आधुनिकीकरण उपायों के हिस्से के रूप में, हज रिस्ट बैंड नामक एक स्मार्ट पहनने योग्य उपकरण लॉन्च किया गया। यह उपकरण हज तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी और स्थान ट्रैकिंग में मदद करेगा। भीड़भाड़ वाले परिवेश में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए यह तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पहल हज यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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नालंदा में आयोजन का प्रतीकात्मक महत्व

बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम का आयोजन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। नालंदा प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध ज्ञान केंद्र था जो विविधता और समावेशिता का प्रतीक था। इस ऐतिहासिक स्थल पर अल्पसंख्यक कल्याण पर विचार-विमर्श करना भारत की बहुलवादी परंपरा और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चिंतन शिविर में शुरू की गई डिजिटल पहल अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में प्रौद्योगिकी के उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ये पहल न केवल सेवा वितरण में सुधार करेंगी बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास भी बढ़ाएंगी।

सपन दास  

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