दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र इस बार कई अहम मुद्दों का गवाह बनने जा रहा है। सरकार वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक सुधार और पुराने कानूनों में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव सदन में रखेगी।✍️Arvind Kumar
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Delhi : दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र इस बार कई अहम मुद्दों का गवाह बनने जा रहा है। सरकार वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक सुधार और पुराने कानूनों में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव सदन में रखेगी। बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी ने 7 से 11 अगस्त तक चलने वाले सत्र के एजेंडे को अंतिम मंजूरी दे दी है। दिल्ली विधानसभा में होने वाले मानसून सत्र की रूपरेखा अब पूरी तरह साफ हो गई है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में पांच दिवसीय सत्र के विधायी कार्यक्रम को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने इस बार एजेंडे में वित्तीय रिपोर्टों के साथ कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव भी शामिल किए हैं, जिससे सदन की कार्यवाही काफी अहम मानी जा रही है।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री रेखा गुप्ता भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की दो रिपोर्टें सदन के पटल पर रखेंगी। एक रिपोर्ट 31 मार्च 2023 तक की अवधि से जुड़ी है, जबकि दूसरी वर्ष 2024-25 के राज्य वित्त का आकलन करती है। इन रिपोर्टों के जरिए सरकारी खर्च, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न विभागों के कामकाज पर चर्चा का रास्ता खुलेगा।
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ऊर्जा मंत्री आशीष सूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) के ओपन एक्सेस नियमों में किए गए संशोधन से संबंधित अधिसूचना और उसके शुद्धिपत्र को सदन में पेश करेंगे। बिजली क्षेत्र से जुड़े नियामकीय ढांचे में हुए बदलावों को लेकर इस दस्तावेज़ पर भी सदन की नजर रहेगी।
सरकार नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं देने से जुड़े मौजूदा कानून की जगह नया विधेयक लाने जा रही है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए वर्ष 2011 में लागू अधिनियम को निरस्त करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाएगी।
मानसून सत्र में दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड अधिनियम, 2010 के एक प्रावधान में संशोधन का विधेयक भी पेश होगा। इसके अलावा बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों से जुड़े वर्ष 2007 के कानून और उसके बाद किए गए संशोधनों को समाप्त करने के लिए भी अलग विधेयक लाया जाएगा। इससे संबंधित कानूनी ढांचे में व्यापक बदलाव का रास्ता खुल सकता है।
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के अलावा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचेतक अभय वर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, सोम दत्त, जितेंद्र महाजन और सुरेंद्र कुमार मौजूद रहे। सभी सदस्यों ने प्रस्तावित विधायी कार्यों पर सहमति जताई, जिसके बाद सत्र के एजेंडे को अंतिम रूप दिया गया।
7 अगस्त से शुरू होने वाले इस सत्र में सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष के लिए CAG रिपोर्टें सरकार से जवाब मांगने का बड़ा आधार बन सकती हैं। नए विधेयकों और पुराने कानूनों को हटाने के प्रस्तावों पर भी सदन में गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है।
बहरहाल इस बार का दिल्ली विधानसभा मानसून सत्र केवल औपचारिक विधायी प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि सरकार की प्रशासनिक सोच और वित्तीय जवाबदेही की भी परीक्षा बनेगा। CAG की दो रिपोर्टें विपक्ष को सरकार से तीखे सवाल पूछने का अवसर देंगी, जबकि समयबद्ध सेवाओं, शेल्टर बोर्ड और बेड एंड ब्रेकफास्ट से जुड़े कानूनों में प्रस्तावित बदलाव सरकार के सुधारवादी एजेंडे को सामने लाते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या सरकार इन विधेयकों पर व्यापक सहमति बना पाएगी या सदन में इन पर राजनीतिक टकराव देखने को मिलेगा। यही इस पूरे सत्र की सबसे बड़ी कहानी साबित हो सकती है।
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