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चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी सबकी निगाहें, हेमंत सोरेने पर आज आ सकता है बड़ा फैसला

Jharkhand News : चुनाव आयोग द्वारा हेमंत सोरेन के खिलाप आज कोई फैसला आ सकता है। सूबे का राजनीतिक माहौल गर्म है, सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकीं हुई हैं। बीते दिनों सीएम हेमंत सोरेन ने आयोग से एक महीने का समय मांगा था।

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

रांची, 10 मई 2022। Jharkhand News – चुनाव आयोग ने बीते दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के जबाव में हेमंत सोरेन ने आयोग से एक माह का समय मांगा और बताया था कि वह अभी अपनी माता के स्वास्थ्य को लेकर व्यस्त चल रहे हैं। अतः उन्हें एक महीने का दिया जाए। लेकिन अब उनके नोटिस की समय सीमा समाप्त होने को आई है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा किसी भी तरह की बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इस संभावित कार्रवाई के चलते प्रदेश की राजनीति का माहौल गर्म हो गया है। सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकीं हुई हैं।

आयोग ने दिया था दस मई तक का समय 

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प्रदेश में खदान लीज मामले में पद का दुरुपयोग की शिकायत पर चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में पूछा गया था कि आप पर कार्रवाई क्यों न की जाए? आयोग द्वारा इस मामले को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 ए के तहत आयोग्यता की भी चेतावनी हेमंत सोरेने को दी गई थी। इस नोटिस में चुनाव आयोग द्वारा सूबे के मुख्यमंत्री को 10 मई तक अपना पक्ष रखने का समय दिया था। प्रदेश के राज्यपाल रमेश बैस ने इस मामले पर भाजपा की ओर से मिले दस्तावेजों को आयोग के संज्ञान के लिए भेजें हैं।

इस नोटिस का जवाब देने के लिए हेमंत सोरेन ने चुनाव आयोग से एक माह का समय मांगा है। इस पर आयोग का क्या रुख होगा उसी पर सभी की निगाहें टिकी हुई है। इस पर आयोग की ओर से आज कोई बड़ा फैसला लिये जाने की उम्मीद लगाई जा रही है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 ए क्या है?

आपको बता दें कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए सरकारी अनुबंधों के लिए किसी सदन से आयोग्यता से संबंध रखती है। मुख्यमंत्री सोरेन के खदान लीज मामले में इसी धारा का उल्लंघन हुआ है। ऐसे में आयोग एक तरफा फैसला लेते हुए सीएम सोरेन को अयोग्य ठहरा सकता है। इस वजह से भी आयोग का फैसला सभी के लिए महत्वपूर्ण है।

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चुनाव आयोग ने सीएम को आयोग्य ठहराया तो क्या होगा?

यदि चुनाव आयोग खदान लीज मामले में सीएम हेमंत सोरेन को दोषी पाते हुए कार्रवाई करती है तो उनको सदन के लिए अयोग्य ठहरा सकती है। ऐसे में सीएम की विधानसभा की सदस्यता जा सकती है। साथ ही उनको अपनी कुर्सी से भी त्यागपत्र देना होगा। ऐसे में प्रदेश का राजनीतिक माहौल अस्थिर हो सकता है। फिलहाल आयोग ने सीएम को दिए नोटिस का समय समाप्त हो चुका है।

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