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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के माइनिंग लीज मामले पर निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव को भेजा नोटिस

माइनिंग लीज मामले में सीएम हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन की संलिप्तता पर निर्वाचन आयोग ने पूछा मुख्यसचिव से सवाल।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 18 अप्रैल। झारखंड में माइनिंग लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इस मामले में भारत के निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में निर्वाचन आयोग द्वारा पूछा गया है कि माइनिंग लीज व गैंड खनन कंपनी में राज्य के सीएम हेमंत सोरेन व बसंत सोरेन की संलिप्ता है या नहीं।

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इसके साथ ही शिकायती की प्रमाणिक सत्यता को बताने के लिए भी मुख्य सचिव को कहा गया है। राज्यपाल रमेश बैस द्वारा दोहरे लाभ के पद में जानकारी मांगे जाने के पश्चात आयोग ने इस नोटिस को जारी किया है। आपको बता दें कि राज्यपाल ने ये जानकारी संविधान के अनुच्छेद 192 के अंतर्गत प्राप्त अधिकार के तहत मांगी है। फिलहाल पत्र कल तक पहुंचने की उम्मीद है।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर आयोग कदम उठाएगा

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र झारखंड के मुख्य सचिव को मिलने के बाद झारखंड की राज्य सरकार इस मामले में अपने सीएम और पार्टनर के रुप में दिये सभी दस्तावेजों की सत्यता पर रिपोर्ट भेजेगी। यदि आयोग को यह दोहरे लाभ के पद का मामला दिखेगा तो वह हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन को अपना पक्ष रखने के लिए नोटस देगा। यदि मामले में संलिप्तता पाई जाएगी तो आयोग राज्यपाल को सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा कर सकता है।

भाजपा नेता रघुवरदास ने लगाया था आरोप 

भाजपा नेता रघुवर दास ने सूबे के सीएम और उनके भाई पर दोहरे पद लाभ का आरोप लगाया, जिसके बाद पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने राज्यपाल को इस मामले में शिकायत पत्र दिया। इस पत्र में भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया था कि वह अनुच्छेद 192 के तहत निर्णय लें।

सीबीआई जांच के दायरे में आ सकते हैं सीएम हेमंत सोरेन

राष्ट्रीय खेल घोटाले में हाईकोर्ट द्वारा CBI जांच के निर्णय के बाद सीएम हेमंत सोरेन व उनके पिता पूर्व सीएम शिबू सोरेन व डीजीप नीरज सिन्हा भी इस जांच के दायरे में आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एसीबी की जांच में हुई देरी के पीछे कई अधिकारियों व संलिप्त राजनेताओं की भूमिका हो सकती है। जांच के समय वर्तमान के डीजीपी निगरानी के उच्च पद पर आसीन थे, इससे वह भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं।

घोटाले की जांच में देरी जानबूझकर की गई

झारखंड हाईकोर्ट ने खेल घोटाले की जांच सीबीआई को देने के पीछे कई वजहों का उल्लेख किया है। 2014 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि इस मामले की जांच आठ माह में पूरी की जाए। लेकिन इसके बावजूद जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। विधानसभा समिति और हाईकोर्ट ने होटवार में स्थित मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स निर्माण में हुए घोटाले की जांच एसीबी (निगरानी) को देने का निर्देश देने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में गलत हफनामा दायर किया गया।

इन दोनों ही मामलों में जिन नेताओं व अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं वह अभी सरकार के उच्च पदों पर आसीन हैं।

इन दोनों मामलों को दबाने, पर्दा डालने और लीपा-पोती करने के पीछे सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारी और नेता जो उस समय राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति में शामिल थे। फिलहाल वे राज्य के शीर्ष पदों पर बैठे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकरण से जुड़े कई अधिकारी व ठेकेदार दूसरे राज्यों में रह रहे हैं, उनसे पूछताछ के लिए बाहर जाना निगरानी क्षेत्राधिकार के बाहर है। जबकि सीबीआई देश में कहीं भी जा सकती है। इसी वजह से सीबीआई इस जांच की उचित एजेंसी होगी।

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