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Gyanvapi Case : ज्ञानवापी हिन्दुओं को सौंपे केंद्र सरकार, काशी में ज्ञानवापी मस्जिद है ही नहीं- अखाड़ा परिषद

श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म नहीं किया जा सकता। इसे दबाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन सनातन धर्म अपने आप में शाश्वत है।

By इंडिया वॉइस 
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हरिद्वार, 24 मई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज और महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार से ज्ञानवापी को बिना देरी की हिन्दुओं को सौंपने की मांग की है।

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आखिरकार महादेव प्रकट हो ही गए- श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि कोर्ट की ओर से गठित सर्वे टीम द्वारा हुए सर्वे के बाद ये साबित हो चुका है कि ज्ञानवापी परिसर काशी विश्वनाथ का विश्वेश्वरनाथ मन्दिर था, जिसे तत्कालीन आंक्रान्ताओं ने नष्ट करने का पाप किया था। उन्होंने कहा कि अब जबकि ज्ञानवापी में शिव मन्दिर होने का प्रमाण मिल चुका है तो इस जगह को हिन्दुओं का सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में महादेव विश्वेश्वरनाथ की पूजा अर्चना होती थी, जिसका वर्णन चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी अपनी किताब में किया है। इस मन्दिर का महारानी अहिल्याबाई होलकर ने जीर्णोद्धार कराया था। दुभार्ग्यवश एक अत्याचारी शासक ने अपनी जिद में हिन्दुओं के पौराणिक स्थल को नष्ट करने का प्रयास किया। अब आखिरकार वहां पर महादेव प्रकट हो ही गए।

काशी में ज्ञानवापी मस्जिद है ही नहीं- श्रीमहंत हरिगिरि महाराज

परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद जल्द ही इस मामले में केन्द्र और यूपी सरकार से मिलकर इस जगह को हिन्दुओं को सौंपने की मांग करेगा। अखाड़ा परिषद महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि काशी में ज्ञानवापी मस्जिद है ही नहीं जिसे ज्ञानवापी मस्जिद कहा जा रहा है, वो काशी विश्वनाथ का विश्वेश्वरनाथ महादेव मन्दिर है।

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औरंगजेब ने ज्ञानवापी मंदिर को तुड़वाया- श्रीमहंत हरिगिरि महाराज

श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि 405 ईस्बी में चीनी यात्री फाह्यान और 635 ईस्वी में भारत भ्रमण पर आए ह्वेनसांग ने अपने प्रसिद्व यात्रा वृत्तांतों में काशी के अविमुक्तेश्वरानंद या विशेश्वर नाथ का जिक्र किया है। इस पौराणिक मंदिर को कई बार मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा तोड़ने का प्रयास किया गया। 12वीं सदी में मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने और 17वीं शताब्दी में शाहजहां ने इस मन्दिर को तोड़ने का असफल प्रयास किया था। लेकिन साल 1669 में मुस्लिम शासक औरंगजेब ने इस मंदिर को तुड़वा दिया और इसके अवशेष से ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कर दिया।

‘ज्ञानवापी के स्थान पर भव्य मन्दिर का निर्माण होना चाहिए’

श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि साल 1776-78 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने काशी विश्व नाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने कई मन स्वर्ण देकर इसके शिखर को स्वर्ण मण्डित कराया था। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को खत्म नहीं किया जा सकता। इसे दबाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन सनातन धर्म अपने आप में शाश्वत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ज्ञानवापी में शिवलिंग होने के प्रमाण मिल जाने के बाद अब ज्ञानवापी परिसर को हिन्दुओं को सौंप देना चाहिए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ज्ञानवापी स्थान पर भव्य मन्दिर का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जायेगा।

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