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Jharkhand : रघुबर के वार से हेमंत बेहाल, झारखंड में सत्ता संग्राम रोचक दौर में

झारखंड में सत्ता संग्राम रोचक मुकाम पर है। रघुबर दास के तीखे हमले ने हेमंत सोरेन को राजनीतिक रूप से लहूलुहान कर रखा है। सामान्य रूप से शांत स्वभाव के सोरेन आक्रामक तेवर में हैं। सुनने में आ रहा है कि उन्होंने निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक नीरज सिंहा को किसी भी तरह से रघुबर दास को अविलंब गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के अनुपालन में असमर्थतता व्यक्त करने पर श्री सिंहा को तत्काल प्रभाव से महानिदेशक निगरानी ब्यूरो के पद से हटा दिया गया है। अभी-अभी सूत्रों से खबर मिली है कि निगरानी के दल ने जमशेदपुर में श्री रघुबर दास द्वारा संरक्षित सूर्य मंदिर परिसर में हंगामा बरपाया है।

By इंडिया वॉइस 
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रांची, 14 मई 2022। झारखंड राजनीतिक एवं प्रशासनिक चक्रवात की चपेट में है, रघुबर दास ने अपनी 3 प्रेसवार्ता के द्वारा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ऐसे हमले बोले की झारखंड में राजनीतिक भूचाल आ गया है। रघुबर दास द्वारा किया गया खुलासा तथ्यों पर आधारित था। उन्होंने मुख्यमंत्री पर अपने नाम से पत्थर का खनन पट्टा लेने तथा अपनी पत्नी की कंपनी को रांची के करीब एक औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 11 एकड़ जमीन आवंटित कर दी। मुख्यमंत्री होने के साथ साथ श्री हेमंत सोरेन इन विभागों के मंत्री भी है। ठोस दस्तावेज़ों के साथ रघुबर दास द्वारा किये गये इन खुलासों से झारखंड की सत्ता की जड़े हिल गई। ना सिर्फ सरकार संकट में है, बल्कि झारखंड के उभरते युवा एवं मृदु भाषी राजनेता का पूरा राजनीतिक भविष्य पर भी ग्रहण लग गया है। चुनाव आयोग ने उन्हें विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के बिंदु पर नोटिस जारी किया है। इन हालातों से सत्ता पे राजनीतिक नेत्रत्व की पकड़ कमजोर हुई है। रघुबर व हेमंत के बीच का ये महाभारत दिनों दिन गहराता जा रहा है। हेमंत सोरेन शासनतंत्र का उपयोग कर रघुबर दास को कानूनी कठघरे में खड़े करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर रघुबर दास भी हेमंत सरकार द्वारा किये गए घोटलों एवं अनियमितताओं की लंबी लिस्ट के साथ हेमंत सोरेन पर और भी घातक हमले की तैयारी में हैं।

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आने वाले दिनो में दोनों ओर से एक दूसरे पर बड़े हमले की संभावना है। देखना है कि इन दोनों के युद्ध के बीच से होकर झारखंड की रजनीतिक एवं सत्ता समीकरण कौन सा रुख अख्तियार करता है। राज्य की जनता के लिए इसका परिणाम जो भी हो इतना तय है कि इन दोनों के बीच का संघर्ष काफी रोचक होने जा रहा है।

इस राजनीतिक उठापटक के बीच ही केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा मुख्यमंत्री के नजदीक महिला आईएएस पदाधिकारी श्रीमति पूजा सिंघल एवं उनके करीबियों के ठिकानों पर डाले गए छापे में मिली बड़ी नकद राशि ने पूरे देश में झारखंड को शर्मसार किया है। नौकरशाह सदमें में हैं। इन नौकरशाहों के अवैध कमाई को ठिकाने लगाने वाले सत्ता के दलाल एवं बिचौलिये सहमे हुए है। सरकारी कार्यलयों में काम ठप हैं, विकास का पहिया थम सा गया है, चाय दुकान से लेकर 5 सितारा होटलों तक में बस यही चर्चा है कि ईडी जांच के इस महाजाल में झारखंड के कौन से बड़े-बड़े नौकरशाह फंसने वाले हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के चुनिंदा अफसरों के नाम ईडी के संभावित शिकार के रूप में हर चौक चौराहे एवं हर जुबान पर चर्चा में हैं। ईडी की जांच का दायरा अवैध खनन की अवैध कमाई तक बढ़ने के साथ ही पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई है। राज्य के एकवरीय भारतीय पुलिस सेवा के पदाधिकारी का नाम इस अवैध कमाई के कमांडर के रूप में चर्चा में है।

हर कोई ये विश्लेषण कर रहा है कि हेमंत सोरेन इस संकट से कैसे निकलेंगे या निकल भी पाएंगे या नहीं? उनके पास अपना शालीन व्यवहार की धरोहर तो है लेकिन उनके शागिर्दों ने जो हालत पैदा की है उससे उनकी छवि एवं विश्वसनियता चिंताजनक रूप से धूमिल हुई है। झारखंड के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे अपने ट्विटर अकाउंट से नए खुलासे और भविष्यवाणियां करके हेमंत सोरेन के संकट को बढ़ा रहे हैं और लोगो के कौतुहल को भी बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। आज वो झारखंड की जनता के बीच बेहतर संवाददाता के रूप में खड़े हैं। वो किसी भी पत्रकार से बेहतर काम कर रहे हैं। श्री हेमंत सोरेन को  भाजपा द्वारा रचे गए इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए फिर से अपने आंदोलनकारी पिता की शरण में जाना होगा। उनके विशाल अनुभव पर भरोसा करना होगा। राज्य के आदिवासी समुदायों के बीच मौजूद उनके प्रति असीम सम्मान एवं भरोसे का कंबल ओढ़कर ही वो अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार की कलिख को ढक पाने में सफल हो पाएंगे और अपने राजनीतिक जीवन के इस गंभीर संकट से बाहर निकलने के लिए शायद कोई रास्ता खोज पाएंगे।

आने वाले दिनों में झारखंड में कई प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न होने की संभावना है। श्री हेमंत सोरेन व बसंत सोरेन की सदस्यता रद्द होने के स्थिति में सोरेन परिवार के लिए अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी का चयन एक बड़ी चुनौती है।

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सदस्यता रद्द होने की स्थिति में भाजपा की संभावित राजनीतिक रणनीति पर भी सब की नज़रें होंगी। यदि भाजपा जांच एजेंसियों की दबिश के कारण उत्पन्न राजनीतिक बिखराव को अपने पक्ष में समेटते हुए विधानसभा में बहुमत की संख्या जुटाने में असफल रही तो राज्य राष्ट्रपति शासन की ओर भी बड़ सकता है और यदि भाजपा आवश्यक बहुमत की संख्या जुटाने में सफल रही तो हेमंत सोरेन के राजनीतिक उत्तराधिकारी को विधानसभा में विश्वासमत के दौरान परास्त करना चाहेगी।

यदि हेमंत सोरेन विधायकों को अपने साथ एकजुट रखने में सफल होते हैं तो सत्ता अप्रत्यक्ष रूप से उनके हाथों में ही होगी। वह अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता का संचालन कितने दिनों तक कर पाएंगे ये इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के तरकश से निकलने वाले तीरों का मुकाबला कितनी कुशलता और समझदारी से करते हैं। ये कहने की जरूरत नहीं है कि सीबीआई, ईडी एवं आईटी जैसी जांच एजेंसियों के तरकश में हेमंत सोरेन के खिलाफ विषैले तीर मौजूद हैं। हेमंत सोरेन को अपने राजनैतिक संपर्क को मजबूत करना होगा, सलाहकार मंडली एवं नौकरशाहों की टोली में व्यापक बदलाव करना होगा तथा अपने कानूनी कवच को सशक्त करना होगा। वहीं दूसरी ओर भाजपा को सत्ता में काबिज होने के लिए अपने राजनैतिक प्रबंधन को व्यवस्थित करना होगा, हेमंत सोरेन पर हमले को अचूक बनाना पड़ेगा तथा अपने राजनीतिक गतिविधियों से राज्य की जनता को ये आश्वस्त करना पड़ेगा कि भाजपा सिर्फ सत्ता के लिए हेमंत को फंसा नहीं रही, बल्कि सत्ता से हेमंत की बेदखली उनके भ्रष्ट का स्वाभाविक परिणाम है। आज झारखंड में ये चर्चा जोरों पर है कि मधु कोड़ा के भ्रष्ट शासन ने कई मंत्रियों को जेल भेजा, लेकिन हेमंत का भ्रष्ट शासन कई आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को भी जेल भेजेगा। जनता इस राजनीतिक संघर्ष के अंत परिणाम के इंतजार की मुद्रा में है।

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