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कठुआ रेप केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, आरोपी शुभम पर चलेगा बालिग के तौर पर केस

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को घटना के वक्त जुवेनाइल मानने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि उस पर नाबालिग अपराधी के तौर पर मुकदमा नहीं चलना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ वयस्क के तौर पर ही ट्रायल चलेगा.

By Ruchi Kumari 
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Kathua Rape Case: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में साल 2018 के दौरान बच्ची से रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी शुभम सांगरा पर नाबालिग नहीं बल्कि बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है.कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इसको जुवेनाइल बताया गया था. जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि किसी आरोपी की उम्र तय करने के लिए अगर कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में ‘ मेडिकल ओपिनियन ‘ को ही सही तरीका माना जायेगा. जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की अपील पर फैसला सुनाया है.

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निचली अदालत और हाई कोर्ट का आदेश किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुवेनाइल तय करने के लिए दस्तावेजों के अभाव में न्याय के हित में मेडिकल राय पर विचार किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ वयस्क के तौर पर ही ट्रायल चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल होने के निचली अदालत के आदेश को रद्द किया. जस्टिस जेबी पारदीवाला ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी आरोपी की उम्र तय करने के लिए अगर कोई पुख्ता सबूत नहीं है, तो ऐसी स्थिति में मेडिकल राय को ही सही तरीका माना जाएगा.

10 जनवरी, 2018 को हुई थी गैंग रेप और हत्या

इसी साल छह जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नोटिस जारी किया था. याचिका में कहा गया कि आरोपी वारदात के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था. 21 फरवरी, 2018 को हाईकोर्ट के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने भी घटना के समय आरोपी की आयु 19 से 23 साल के बीच मानी थी. 10 जनवरी, 2018 का दिन शायद ही कोई भूल पाया हो. एक मासूम बच्ची का अपहरण कर कई दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया गया था. इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई .

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केस में अब तक सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई 2018 को इस मामले को कठुआ से पंजाब के पठानकोट में ट्रांसफर कर दिया था और रोजाना सुनवाई के आदेश दिए थे. पठानकोट की विशेष अदालत ने 10 जून, 2018 को एक मंदिर के पुजारी सांजीराम समेत तीन मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जबकि मामले में सुबूत मिटाने के लिए तीन पुलिसवालों को पांच वर्ष जेल की सजा और 50-50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी. वहीं, सांजीराम के बेटे विशाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था.

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