Delhi : दिल्ली के कल्याणपुरी में 27 वर्षीय सफाईकर्मी अनिल कुमार की हत्या के बाद सफाई कर्मचारियों और ऑटो-टिपर चालकों का गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस ने हत्या के आरोपी निहाल को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं मृतक के परिजनों ने मांगें पूरी होने तक शव लेने से इनकार कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को एमसीडी में स्थायी नौकरी और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
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हत्या के बाद अस्पताल के बाहर बड़ा प्रदर्शन
कल्याणपुरी में सफाईकर्मी अनिल कुमार की हत्या के बाद सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी और ऑटो-टिपर चालक जमा हुए। प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब एक हजार बताई गई। कर्मचारियों ने अनिल के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को स्थायी एमसीडी नौकरी देने और उसके नियोक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पत्नी से संबंध के शक में था आरोपी
पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार 52 वर्षीय निहाल को शक था कि उसकी पत्नी के टिपर चालक गुलशन से संबंध हैं। निहाल की पत्नी भी उसी कंपनी में काम करती है। पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले गुलशन को चेतावनी दे चुका था और अनिल से भी उसे समझाने के लिए कहा था।
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रविवार सुबह निहाल कथित तौर पर गुलशन से भिड़ने पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, वह नशे में था और उसके पास चाकू था। गुलशन से सामना नहीं होने पर उसने अनिल पर हमला कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी के अनिल के पीछे से पहुंचने और चाकू से हमला करने की बात सामने आई है। घायल अनिल को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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परिवार ने शव लेने से किया इनकार
अनिल के परिजनों ने आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद शव लेने से इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि जब अनिल रोज की तरह सुबह ड्यूटी के लिए घर से निकला था, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वह वापस नहीं लौटेगा। परिजनों ने आरोपी को कड़ी सजा देने के साथ अपनी आर्थिक मांगें पूरी करने की अपील की है।
परिवार के मुताबिक, अनिल करीब 18 हजार रुपये मासिक कमाता था और घर का मुख्य सहारा था। वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी उठाता था। परिवार में उसके बड़े भाई की तबीयत खराब रहने के कारण वह काम करने की स्थिति में नहीं हैं।
सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा असर
प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कुछ इलाकों में कूड़ा उठाने की व्यवस्था प्रभावित हुई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को राजधानी के दूसरे हिस्सों तक फैलाया जाएगा। स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर के बाहर दिल्ली पुलिस के साथ सीआरपीएफ के जवान भी तैनात किए गए।
कंपनी और काम की परिस्थितियों पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने अनिल को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कथित देरी की जांच की मांग की है। सहकर्मियों का आरोप है कि सफाई कर्मचारियों को काम के दौरान सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और पहले भी कई कर्मचारी हादसों में घायल हुए हैं।
सफाई कर्मचारी संगठनों ने संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें पूरा वेतन व अन्य लाभ देने की मांग भी उठाई है। संगठन के एक पदाधिकारी ने आरोप लगाया कि एमसीडी प्रत्येक कर्मचारी के लिए कंपनी को करीब 24 हजार रुपये का भुगतान करती है, जबकि कर्मचारियों को 14 से 18 हजार रुपये तक ही मिलते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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अनिल के परिवार और सहकर्मियों ने उसे शांत स्वभाव, अनुशासित और जिम्मेदार कर्मचारी बताया। अब आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ रही है, जबकि परिवार और सफाई कर्मचारियों का आंदोलन उनकी मांगों पर प्रशासन के रुख का इंतजार कर रहा है।
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