Delhi : दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले यमुना को लेकर दिल्ली सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।✍️अरविंद कुमार
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Delhi : दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले यमुना को लेकर दिल्ली सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार अब साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर यमुना के दोनों किनारों को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा के नेतृत्व में अधिकारियों के अहमदाबाद दौरे के बाद दिल्ली में वर्ल्ड-क्लास यमुना रिवरफ्रंट विकसित करने का दावा किया गया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले यमुना की सफाई और कायाकल्प एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार अब नदी की स्थिति सुधारने के साथ-साथ उसके किनारों को भी नया स्वरूप देने की तैयारी में जुटी है। सरकार का दावा है कि यमुना को केवल साफ करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे दिल्ली के लिए एक आधुनिक और आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसी कड़ी में जल मंत्री प्रवेश वर्मा के नेतृत्व में दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवरफ्रंट का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने वहां नदी के पुनर्विकास, किनारों के सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मॉडल को समझा। साबरमती रिवरफ्रंट से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक में करीब 25 वर्षों में हुए विकास कार्यों और उनके अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
दिल्ली में प्रस्तावित रिवरफ्रंट के तहत यमुना के दोनों किनारों पर वॉकिंग पाथवे, पार्क और साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना है। इन स्थानों को लोगों के लिए सुबह-शाम टहलने, योग और अन्य गतिविधियों के अनुकूल बनाया जाएगा। इसके अलावा खेलकूद के आयोजन, पिकनिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी सुविधाएं तैयार करने की बात कही गई है।
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जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने साबरमती मॉडल को दिल्ली की जरूरतों के मुताबिक अपनाने की बात कही है। उनका कहना है कि अलग-अलग सरकारी विभाग मिलकर यमुना के सुधार के लिए काम कर रहे हैं। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, डीडीए और एमसीडी के बीच समन्वय के जरिए इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार इसे दिल्ली को एक विश्वस्तरीय रिवरफ्रंट देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
हालांकि यमुना को नया स्वरूप देने की राह आसान नहीं है। हालिया शोध में दिल्ली के भीतर यमुना के नदी-पाट और फ्लडप्लेन में बड़े बदलाव की बात सामने आई है। बैराज, तटबंध, शहरीकरण और अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक बहाव को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक फ्लडप्लेन के कमजोर होने का असर भूजल रिचार्ज और जैव-विविधता पर भी पड़ता है। ऐसे में चुनाव से पहले यमुना पर सरकार का यह फोकस कितना जमीन पर उतरता है, यह आने वाले समय में अहम होगा।
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