मुख्य सामग्री पर जाएँ

इंडिया वॉइस

Breaking News सभी अपडेट
क्षेत्रीय

दीपावली पर पान चढ़ाने और मीठा पान खाने की परंपरा है बेहद खास

HO BUREAU

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान अमृत से भरा कलश प्रकट हुआ था। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें जब धरती पर गिरीं, तो उन्हीं से पान की बेल यानी नागवल्ली का जन्म हुआ। इसी वजह से पान को अमृत के समान पवित्र और शुभ माना जाता है।

दीपावली पर पान चढ़ाने और मीठा पान खाने की परंपरा है बेहद खास
The tradition of offering paan (betel leaf) and consuming sweet paan during Diwali is truly special.
शेयर करें

दीपावली को भारतीय संस्कृति में सुख, सौभाग्य और खुशहाली का त्योहार माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों को दीपों और आकर्षक रोशनी से सजाते हैं। विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। परिवार और रिश्तेदार भी एक साथ मिलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं। दीपावली से जुड़ी इन्हीं खास परंपराओं में पान का भी महत्वपूर्ण स्थान है। कई परिवारों में लक्ष्मी पूजन के दौरान पान का पत्ता चढ़ाया जाता है और कुछ जगहों पर पूजा और भोजन के बाद मीठा पान खाने एवं खिलाने की परंपरा है।

पान की उत्पत्ति के पीछे की पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान अमृत से भरा कलश प्रकट हुआ था। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें जब धरती पर गिरीं, तो उन्हीं से पान की बेल यानी नागवल्ली का जन्म हुआ। इसी वजह से पान को अमृत के समान पवित्र और शुभ माना जाता है।

लक्ष्मी-गणेश की पूजा में पान चढ़ाने का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में पान के पत्ते को शुभ और मांगलिक वस्तुओं में शामिल किया जाता है। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी इसका उपयोग देखने को मिलता है। दीपावली पर होने वाले लक्ष्मी पूजन में भी पान अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, देवी-देवताओं को पान चढ़ाना उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है। इसे परिवार में सुख, संपन्नता और सौभाग्य की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है।

पान के साथ सुपारी, इलायची और चांदी का सिक्का रखने की परंपरा

दीपावली की पूजा के दौरान अनेक घरों में पान के पत्ते पर सुपारी, हरी इलायची और चांदी का या अन्य कोई सिक्का रखकर देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। इस परंपरा के पीछे भी धार्मिक विश्वास जुड़े हुए हैं। विभिन्न पूजा विधियों में सुपारी को भगवान गणेश के प्रतीक के रूप में स्थान दिया जाता है। हरी इलायची को शुक्र ग्रह का प्रतीक मानते हैं जो धन, आकर्षण और ऐश्वर्य से जुड़ी है। वहीं सिक्के को धन-संपत्ति, वैभव और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि पान, सुपारी, हरी इलायची और सिक्के को एक साथ अर्पित करके भक्त मां लक्ष्मी और भगवान गणेश से अपने परिवार के लिए सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कुछ परिवारों में पूजा संपन्न होने के बाद इनको एक पीले या लाल रंग की पोटली में बांधकर तिजोरी या धन रखने वाली जगह पर रखने की मान्यता है।

त्योहार पर मीठा पान खाने का भी है रिवाज

भारतीय खानपान और सामाजिक जीवन में पान की भूमिका काफी पुरानी रही है। इसे केवल खाने की वस्तु के तौर पर ही नहीं, बल्कि मेहमानों के स्वागत और पारिवारिक मेल-मिलाप की परंपरा के रूप में भी देखा जाता है। मांगलिक अवसरों और धार्मिक समारोहों में भोजन के बाद पान परोसने का चलन रहा है। पारंपरिक रूप से पान का इस्तेमाल मुखशुद्धि के लिए भी किया जाता रहा है।

इसी सांस्कृतिक रिवाज के चलते कई परिवारों में दीपावली के दिन पूजा और भोजन के बाद मीठा पान खाने या मेहमानों को परोसने की परंपरा देखने को मिलती है। हालांकि, यह परंपरा हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं है।

अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हैं पान से जुड़े रिवाज

भारत की सांस्कृतिक विविधता के कारण दीपावली मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। इसी तरह पान को लेकर भी हर परिवार और क्षेत्र की अपनी परंपरा हो सकती है। कुछ घरों में इसे केवल पूजा सामग्री के रूप में देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर इसे प्रसाद के तौर पर या भोजन के बाद परोसा जाता है। इसलिए दीपावली पर पान खाने को पूरे देश में लागू किसी अनिवार्य धार्मिक नियम के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह मुख्य रूप से अलग-अलग इलाकों में प्रचलित धार्मिक और पारिवारिक रीति-रिवाजों से जुड़ा है।

धार्मिक आस्था के साथ संस्कृति का भी हिस्सा है पान

दीपावली पर पान का महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। पूजा के दौरान पान का पत्ता अर्पित करना हो या त्योहार की खुशियों में अपनों को मीठा पान खिलाना, दोनों ही रिवाज श्रद्धा, अपनापन और मेल-मिलाप की भावना को दर्शाते हैं। यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद दीपावली से जुड़े कई पारंपरिक आयोजनों और पूजा-पद्धतियों में पान आज भी अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

✍️Satyam Kushwah

देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें। 

शेयर करें