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चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, हम ऐसा नहीं होने देंगे: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपे जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चीन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका ऐसा हरगिज नहीं होने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनकी सरकार इस अहम जलमार्ग पर चीन के बढ़ते दखल को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

By HO BUREAU 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपे जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चीन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका ऐसा हरगिज नहीं होने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनकी सरकार इस अहम जलमार्ग पर चीन के बढ़ते दखल को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में बुधवार (स्थानीय समय) को राष्ट्रपति ट्रंप ने नहर के कंस्ट्रक्शन की देखरेख के लिए पूर्व प्रेसिडेंट थियोडोर रूजवेल्ट की तारीफ की और इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक बताया।

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ट्रंप ने नहर के बारे में किसी नई पॉलिसी या कार्रवाई की घोषणा नहीं की

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “अब चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और हम ऐसा नहीं होने देंगे।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहर का नियंत्रण ट्रांसफर करने के अमेरिका के फैसले की अपनी पुरानी आलोचना दोहराई और कहा कि यह एक गलती थी। उन्होंने कहा, “हमने इसे दे दिया। यह अब तक की सबसे महंगी चीज थी जो हमने बनाई थी और यह अब तक की सबसे ज्यादा फायदेमंद चीज भी थी।” उन्होंने यह भी दावा किया कि नहर का नियंत्रण लेने के बाद पनामा ने ट्रांजिट फीस में तेजी से बढ़ोतरी की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “उन्होंने जो पहला काम किया, उन्होंने जहाजों की कीमतें चार गुना बढ़ा दीं और उन्हें एक भी जहाज नहीं खोना पड़ा। और फिर उन्होंने इसे दो बार और बढ़ाया, और उन्हें एक भी जहाज नहीं खोना पड़ा।” राष्ट्रपति ने रूजवेल्ट की विरासत पर चर्चा करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति का नेतृत्व संरक्षण और घरेलू सुधारों से आगे बढ़कर पनामा नहर सहित बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक फैला हुआ था। ट्रंप ने नहर के बारे में किसी नई पॉलिसी या कार्रवाई की घोषणा नहीं की।

 

पनामा नहर को अमेरिका ने 20वीं सदी की शुरुआत में प्रेसिडेंट थियोडोर रूजवेल्ट के समय बनवाया था। 1977 में हस्ताक्षर किए गए संधि के तहत, अमेरिका ने धीरे-धीरे नहर का कंट्रोल पनामा को ट्रांसफर कर दिया और 31 दिसंबर, 1999 को यह हैंडओवर पूरा हुआ। नहर को पनामा कैनाल अथॉरिटी चलाती है, जो पनामा सरकार की एक ऑटोनॉमस एजेंसी है। 82 किमी लंबी यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है और दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक है, जो दुनिया भर के समुद्री व्यापार का लगभग पांच फीसदी हिस्सा ढोता है। यह अंतरराष्ट्रीय कॉमर्स के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है, जिसमें भारत के साथ होने वाला व्यापार भी शामिल है, जहां शिपिंग लागत में बदलाव या नहर यातायात में रुकावट से माल ढुलाई की दरों और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

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Edited by : Ankit Singh

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