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UNGA : ‘आतंकवाद शांति के लिए खतरा…’, संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोले विदेश मंत्री जयशंकर

UNGA : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया।✍️Avinay Mishra

By HO BUREAU 

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UNGA : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद, ग्लोबल साउथ, AI और समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने महात्मा गांधी के शांति के संदेश का जिक्र किया। विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के औद्योगीकरण के अधिकार को गैर-बाजार प्रथाओं और बाजार तक पहुंच से रोकने की कोशिशों से कमजोर किया जा रहा है।

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि तकनीक की जो प्रगति उम्मीद जगाने के लिए थी, वह अब चिंता का कारण बन गई है। AI का गलत इस्तेमाल भेदभाव को बढ़ा रहा है और आपसी सम्मान को कम कर रहा है। ये हालात संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों और उद्देश्यों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। आतंकवाद शांति के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि यह तथ्य कि इसे सीमा-पार के मकसद से किसी देश का समर्थन मिल सकता है, इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बनाता है। ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के प्रति हमारी ‘जीरो-टॉलरेंस’ (सख्त) नीति में कोई ढील नहीं होनी चाहिए। खासकर इसके वित्तीय पहलुओं को उजागर किया जाना चाहिए और उनका मुकाबला किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस आम बहस के आखिर में हमें उम्मीद है कि इसमें शामिल सभी प्रतिनिधिमंडल शांति, विकास और खुशहाली के लिए और ज़्यादा मज़बूत संकल्प के साथ लौटेंगे। यह कोई थोपी हुई बात या बातचीत का मामला नहीं हो सकता। यह एक सोच, एक नज़रिया और एक विश्वास होना चाहिए। इस इमारत के बाहर बने लॉन में महात्मा गांधी के प्रभावशाली शब्द लिखे हैं और वे शब्द आज के समय के लिए प्रेरणा का काम करने चाहिए। शांति का कोई रास्ता नहीं है। शांति ही रास्ता है।

समुद्री क्षेत्र में भी नई चुनौतियां : विदेश मंत्री

विदेश मंत्री ने कहा कि ज़मीन पर मौजूद पुरानी चुनौतियों के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में भी नई चुनौतियां सामने आई हैं। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर से लेकर काला सागर तक, कमर्शियल जहाज़ों और नाविकों पर हमले हुए हैं। इन हमलों में भारतीय नाविकों के साथ-साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है। यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। भारत, लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदारों के साथ मिलकर एक ऐसी पहल में शामिल हुआ है, जिसका मकसद इस तरह के अनुचित हमलों के खिलाफ़ दुनिया भर में जनमत तैयार करना है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा से कभी समझौता न हो।

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✍️Avinay Mishra

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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