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हिमाचल ही नहीं देश की राजनीति में बड़ा नाम था पंडित सुखराम, कांग्रेस ने जताया दुख

कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता पंंडित सुखराम का आज निधन हो गया। इस पर कांग्रेस ने श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा वह हिमाचल की राजनीति में सदैव याद किये जाएंगे।

By इंडिया वॉइस 
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मंडी, 11 मई। हिमाचल के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राजनीति के चाण्क्य के नाम से मशहूर पंडित सुख राम हिमाचल ही नहीं देश की राजनीति का बड़ा नाम था। देश में संचार क्रंति के मसीहा के रूप में वे लोगों के दिलों में सदैव याद रहेंगे। पं. सुखराम का जन्म 27 जुलाई 1927 मंडी जिला के इलाका तुंगल स्थित कोटली गांव में पं. भवदेव के घर हुआ। वे दस भाई-बहन थे। उनकी शिक्षा मंडी के विजय हाई स्कूल के पश्चात वल्लभ कॉलेज व लॉ कॉलेज दिल्ली से हुई। पं. सुखराम नगर पालिका मंडी में सचिव के पद पर कार्यरत थे।

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लोगों के आग्रह पर उन्होंने 1962 में हिमाचल प्रदेश प्रादेशिक परिषद के लिए आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और महान स्वतंत्रता सेनानी सिंध के गांधी के नाम से मशहूर स्वामी कृष्णा नंद जो कांग्रेस के प्रत्याशी थे को हराया। इस चुनाव में तुंगल के किसान नेता धनीराम ठाकुर उनके मार्गदर्शक बनकर चले। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर वर्ष 1984 तक मंडी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालय जिसमें लोकनिर्माण, कृषि व पशुपालन शामिल इनके पास रहे। प. सुखराम हिमाचल की राजनीति में अपनी दमदार उपस्थिति करवाते हुए मंडी जिला से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी जताते रहे हैं।

प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार के करीबी रहे और मंडी से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार ठा. कर्म सिंह के विरोध में खड़े हो गए। उस समय के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जिनमें चौधरी पीरू राम ,पं. गौरी प्रसाद के अलावा रंगीला राम राव व कौल सिंह के विरोध के चलते पं. सुखराम मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर होते चले गए। वर्ष 1993 में तो 22 विधायकों के समर्थन के बावजूद मंडी से समर्थन न मिल पाने की वजह से पं. सुखराम मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर हो गए। पं. सुखराम ने 1993 से 1996 तक संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में संचार क्रांति का सूत्रपात कर देश भर में अपनी पहचान बनाई।

पं. सुखराम पांच बार हिमाचल विधानसभा और तीन बार लोकसभा के लिए मंडी संसदीय सीट से चुने गए। वह 1984 में लोकसभा के लिए चुने गए और राजीव गांधी सरकार में एक कनिष्ठ मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने रक्षा उत्पादन और आपूर्ति, योजना और खाद्य और नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। सुख राम ने 1993 से 1996 तक केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संचार विभाग संभाला। लेकिन दूरसंचार घोटाले के बाद दोनों को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया। हिमाचलन में गठबंधन सरकार बनाने का श्रेय भी पं. सुखराम को ही जाता है।

उन्होंने वर्ष 1998 में हिमाचल प्रदेश भाजपा के साथ चुनाव के बाद गठबंधन किया और सरकार में शामिल हो गए। सदर विधानसभा क्षेत्र पं. सुखराम का गढ़ माना जाता है। जहां से उन्होंने कोई भी चुनाव नहीं हारा है। पं. सुखराम ने 1998 में मंडी सदर से विधानसभा क्षेत्र से हिविकां के टिकट पर चुनाव लड़ा और 22000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की जो उस समय प्रदेश में जीत का सबसे ज्यादा अंतर था। 2004 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस में शामिल हो गए और अपनी पार्टी का विलय भी कांग्रेस में कर दिया। 2017 में, चुनाव से पहले, वीरभद्र सिंह से अनबन के चलते पं. सुखराम राम अपने पोते आश्रय शर्मा के साथ भाजपा में शामिल हो गए। इस चुनाव में भाजपा ने मंडी जिले की 10 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की और एक सीट यानी जोगिंदर नगर को निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत लिया। मगर वर्ष 2019 में पोते की राजनीतिक महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए पं. सुखराम पोते आश्रय शर्मा के साथ वापस कांग्रेस में लौट आए। यहीं से उनके राजनीतिक पतन का दौर भी शुरू हो गया। पोता आश्रय शर्मा मोदी लहर में चार लाख से भी अधिक मतों से पराजित हो गया। और उनके बेटे अनिल शर्मा को मंत्री पद छोडऩा पड़ा। उनके एक और पोते आयुष शर्मा एक अभिनेता हैं और उन्होंने सुपरस्टार सलमान खान की बहन से शादी की है।

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विकासात्मक सोच: पं. सुखराम की सोच विकासात्मक रही है। विधानसभा और लोकसभा में जिस भी मंत्रालय में रहे उसके कार्यालय मंडी लाने व रोजगार सृजन करने में उनका सदैव योगदान रहा है। प्रदेश में जब वे पशुपालन मंत्री थे तो गांव-गांव में मिल्क चिलिंग सेंटर उनके द्वारा खोले गए। इसके अलावा बतौर केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रहते हुए मंडी में भारतीय खाद्यनिगम का भंडार मंडी लाए। रक्षा राज्य मंत्री रहते हुए मंडी और हमीरपुर में सेना भर्ती कार्यालय खुलवाए। केंद्र में बतौर योजना मंत्री रहते हुए मंडी में सीवरेज और इंदिरा मार्किट के लिए बजट का प्रावधान करवाया। जबकि बतौर संचार मंत्री देश के साथ-साथ हिमाचल में भी टेलिफोन एक्सचेंज और दूर संचार का नेटवर्क खड़ा किया।

भाजपा हिविकां गठबंधन सरकार के दौरान जब मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा तो रोजगार संसाधन सृजन के अध्यक्ष के रूप में युवाओं के लिए स्वरोजगार की योजना का खाका तैयार किया। पं. सुखराम का राजनीतिक जीवन जुझारू एवं संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने राजनीति की ऊंचाइयों को छुआ वहीं पर राजनीतिक षडय़ंत्रों के तहत भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे, जिन्हें अदालत में चुनौती देकर स्वयं को बेदाग साबित करने की उनकी हसरत ही रह गई।

वरिष्ठ नेता पंडित सुखराम के निधन पर कांग्रेस ने जताया दुख

वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री पंडित सुखराम के निधन पर कांग्रेस ने दुख प्रकट किया है।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि पंडित सुखराम के निधन की खबर सुन गहरा आघात हुआ। उनका सरल स्वभाव, मिलनसार छवि, कड़ी मेहनत का जज्बा व जमीनी कार्यकर्ता से जुड़ाव, अगली पीढ़ी के लिए सदैव एक मार्गदर्शक रहेगा।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित सुखराम के निधन से कांग्रेस परिवार को गहरा आघात लगा है। कांग्रेस परिवार की तरफ से उन्होंने परिजनों व प्रियजनों के प्रति शोक संवेदनाएं प्रकट की।

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