Jaishankar : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
Updated Date
Jaishankar : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “सुबह बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात करके खुशी हुई।
मैंने उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं। हमने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस साझा प्रयास के प्रति उनके सकारात्मक रुख की सराहना करता हूं।” अपने दौरे के दौरान जयशंकर अजरबैजान के विदेश मंत्री के साथ भी बैठक करेंगे। दोनों नेता भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
इससे पहले 16 अक्टूबर को भारत के अजरबैजान में राजदूत अभय कुमार ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना परिचय-पत्र सौंपा था। उस दौरान उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता जताई थी। अजरबैजान में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर कहा था कि राजदूत अभय कुमार ने भारत और अजरबैजान के बीच सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को और गहरा करने की दिशा में काम करने का भरोसा दिया।
बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अजरबैजान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने हैं। ये रिश्ते सदियों से विकसित होते रहे हैं और आज भी दोनों देशों के संबंधों की मजबूत नींव बने हुए हैं। दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया और आपसी हितों के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच बिश्केक में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया गया। राजदूत अभय कुमार और राष्ट्रपति अलीयेव ने द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाने तथा सहयोग के नए रास्ते तलाशने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपनी पुरानी मित्रता, ऐतिहासिक जुड़ाव और आपसी सद्भाव को आधार बनाकर नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए। (आईएएनएस)
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।