तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत नोटिस जारी किया है। सांसदों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।✍️अरविंद कुमार
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West Bengal : तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत नोटिस जारी किया है। सांसदों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं के बाद हुई है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और इससे संसद में दल-बदल कानून की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा। यह नोटिस टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की उन याचिकाओं के आधार पर जारी किए गए हैं, जिनमें सांसदों की सदस्यता दल-बदल विरोधी कानून के तहत रद्द करने की मांग की गई है। टीएमसी का आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया।
इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में 20 सांसदों को नोटिस जारी किए। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि सवाल सिर्फ नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि अयोग्यता की कार्यवाही को तय समयसीमा में पूरा कराने का है। अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।
टीएमसी की ओर से जिन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, पार्थ भौमिक, सयानी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय समेत कुल 20 सांसद शामिल हैं। अब इन सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देना होगा।
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इसके बाद मामले की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया तय होगी। यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध संविधान की दसवीं अनुसूची, दल-बदल विरोधी कानून और लोकसभा अध्यक्ष की संवैधानिक भूमिका से है। साथ ही, संसद में राजनीतिक दलों की मान्यता और सांसदों की सदस्यता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर भी इस मामले का असर पड़ सकता है।
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