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हजारीबाग में बिजली कटौती से परेशान हैं लोग, बोले सरकार ने नहीं ध्यान दिया तो बंद हो जायेंगे सारे उद्योग

हजारीबाग में उद्योग संचालन करने वालों का कहना है, कि बिजली की कटौती के कारण उनके व्यवसाय पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। और यदि आगे भी यही स्थिति बनी रही तो हो सकता है आगे उन्हें आगे उन्हें अपना व्ययसाय भी बंद करना पड़े।

By इंडिया वॉइस 
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झारखंड : सरकार ने जीरो कट बिजली का वादा किया था लेकिन उस वादे के पूरा होने की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। राज्य के हजारीबाग में पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से की जा रही बिजली कटौती के कारण आम लोगों का जनजीवन तो बुरी तरह से प्रभावित हुआ ही है, साथ ही वहां के कई उद्योग व धंधे भी बंद होने के कगार पर आ गए हैं। हजारीबाग में उद्योग संचालन करने वालों का कहना है, कि बिजली की कटौती के कारण उनके व्यवसाय पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। और यदि आगे भी यही स्थिति बनी रही तो हो सकता है आगे उन्हें आगे उन्हें अपना व्ययसाय भी बंद करना पड़े।

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गौरतलब है कि यहाँ प्लास्टिक उद्योग के अलावा करीब 15 हैचरी उद्योग का भी संचालन किया जाता है। इन हैचारियों से मुर्गे व चूजे का उत्पादन किया जाता है। संचालनकर्ताओं के अनुसार बिजली के  अभाव में हैचरी में पैदा किये जा रहे चूजे और अंडे बर्बाद हो जायेंगे। संचालनकर्ताओं के मुताबिक़ ऐसे में चौबीस घंटा अनवरत बिजली आपूर्ति चाहिए। उद्योगकर्ताओं ने बताया कि बिजली की कमी के कारण ही हजारीबाग के सबसे बड़े राइस मिल को भी बंद करना पड़ा है।

झारखंड राज्य लघु उद्योग संघ के जिलाध्यक्ष व रिश्ता प्लास्टिक के संचालक सुनील अग्रवाल के अनुसार 2.5 घंटे के हिसाब से 24 घंटे में तीन बार बिजली कटौती की जाती है। जिससे फैक्ट्री में मशीनों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पाता है। वहीं बिजली नहीं रहने की स्थिति में

उन्हें डीजी सेट का इस्तेमाल करना पड़ता है। जिसके कारण 6 से 7 गुना अधिक खर्च आता है। आगे उन्होंने बताया कि अब उत्पादन भी 50 प्रतिशत तक गिर चुका है। ऐसे में वन व्यवसायियों के लिए उद्योग बंद करने के आलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने सरकार से उम्मीद की गुहार लगते हुए कहा कि यदि सरकार अब भी हमारी ओर ध्यान नहीं देती है तो आने वाले दस से पंद्रह दिनों में हमें अपने उद्योगों को विवश होकर बंद करना पड़ेगा।

यह कटौती राज्य के 7 जिलों में बीते वर्ष नवंबर से ही की जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ बिजली कटौती का मुख्य कारण डीवीसी का बिजली वितरण निगम पर बकाया है। हालांकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य सरकार के आरबीआइ खाते से 1400 करोड़ और 712 करोड़ की कटौती की है। इसके बाद भी अभी तक बकाए का पूरा भुगतान नहीं हो पाया है।

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