Ankita Bhandari Case : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा है और सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
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Ankita Bhandari Case : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा है और सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा, “अंकिता भंडारी की उम्र 19 साल थी, जब 18 सितंबर 2022 को उसकी हत्या कर दी गई। वह ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। उसके नियोक्ता पुलकित आर्य, जो एक भाजपा नेता का बेटा है, ने उस पर वीआईपी मेहमानों को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया। उसने इनकार कर दिया। पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों ने उसकी हत्या कर दी। तीनों अब आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।”
राहुल ने कहा कि चार साल से एक सवाल अनुत्तरित है – वो वीआईपी कौन थे? इस साल जनवरी में उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने यह सवाल सीबीआई को सौंप दिया था और उसकी जांच अभी भी जारी है।
उन्होंने पत्र में लिखा, “इसलिए मुझे दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने के बारे में जानकर सदमा लगा। अंकिता के परिवार सहित कई लोग आरोप लगाते हैं कि गौतम इस अपराध से जुड़े हैं। वीआईपी कौन थे, यह पता लगाने के लिए सीबीआई जांच जारी है, लेकिन बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।”
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को याद दिलाया कि राज्यपाल राज्य सरकार का संवैधानिक प्रमुख होता है, जैसे राष्ट्रपति भारत सरकार की संवैधानिक प्रमुख हैं। पद पर रहते हुए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जा सकती।
उन्होंने लिखा, “दुष्यंत गौतम की नियुक्ति उन्हें सीबीआई की पहुंच से बाहर कर देती है। एक ऐसी जांच जिसका परिणाम कभी अभियोजन में नहीं हो सकता, वह केवल नाम की जांच है। एक राज्यपाल को अपने राज्य के लोगों का विश्वास हासिल करना चाहिए। इस तरह के साये में कोई भी व्यक्ति इस पद पर नहीं रह सकता।”
राहुल ने कहा कि वह जानते हैं कि राज्यपालों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर महिला सुरक्षा के प्रति अपनी घोर उपेक्षा साबित की है। हालांकि, लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति को सरकार को चेतावनी देने का अधिकार है और अनुच्छेद 74(1) उन्हें सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कहने की शक्ति देता है।
पत्र के अंत में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया, “मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप सरकार से इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने के लिए कहें और जब तक सीबीआई अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक गौतम पदभार ग्रहण न करें। अंकिता ने उससे की गई घृणित मांग को मानने से इनकार कर दिया और इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई। उसके माता-पिता, जो अभी भी न्याय के लिए लड़ रहे हैं, अब इस नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं और पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जा रहे हैं। कृपया कार्रवाई करें अंकिता के शोक संतप्त माता-पिता को सांत्वना प्रदान करें और राज्यपाल के उच्च पद की रक्षा करें।” (आईएएनएस)
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