20 फरवरी 2026 को United States Supreme Court ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया, जब कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ आदेशों को गैरकानूनी और रद्द (struck down) करार दिया। न्यायालय ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ़ United States Congress में है, न कि राष्ट्रपति के पास 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत एकतरफा निर्णय लेने का अधिकार।
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फैसला क्या है और क्यों आया?
सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से यह स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने IEEPA के तहत जो टैरिफ लगाए थे, वे संविधान के अनुरूप नहीं थे। कोर्ट के अनुसार, महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णयों को केवल कांग्रेस की मंज़ूरी से लागू किया जा सकता है, न कि राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों के दायरे में।
यह निर्णय विशेष रूप से अमेरिका की व्यापक व्यापार नीति के लिए बड़ा संकेत है, क्योंकि यह राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को सीमित करता है और कांग्रेस की विधायी प्राथमिकता को रेखांकित करता है।
भारत जैसे देशों पर इसका असर
भारत के लिए यह फैसला काफी अहम है क्योंकि पिछले साल अमेरिका ने अपनी आयात नीति के तहत भारत सहित कई देशों के सामान पर 18 % तक के अतिरिक्त शुल्क लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब *लगभग 55 % तक के भारतीय निर्यात को अमेरिका में 18 % शुल्क से मुक्त होने का रास्ता खुल सकता है, जिससे भारतीय निर्यातक कंपनियों को काफी राहत मिलेगी और व्यापार बेहतर मार्ग पर आ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक़, इस फैसले से भारत-अमेरिका के वाणिज्यिक संबंधों में नई गति और व्यापार विचारों का पुनर्मूल्यांकन संभव होगा, क्योंकि अब अमेरिका को अपनी व्यापार रणनीति को कांग्रेसी मंज़ूरी के साथ बनाना पड़ेगा।
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ट्रंप की प्रतिक्रिया और नई रणनीति
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले से “बेहद निराशा” हुई है और कोर्ट को लेकर उन्होंने संविधान के सीमाओं के विषय पर अपनी असहमति जताई।
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा आदेशों को रद्द किया है, ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम (Trade Act) के सेक्शन 122 के तहत नया 10 % ग्लोबल टैरिफ लागू करने का भी आदेश जारी किया — जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका के सभी देशों के सामान पर लागू किया गया है। यह टैरिफ 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा और इसके तहत कुछ अतिरिक्त उपायों की समीक्षा जारी रहेगी।
वैश्विक और आर्थिक प्रभाव
यह फैसला वैश्विक व्यापार व्यवस्था के संतुलन, आर्थिक अनिश्चितता, और विश्व आर्थिक मंच पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है:
- भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाओं को निर्यात का अवसर बढ़ेगा
- अमेरिका-कांग्रेस को व्यापार नीति में बड़ा रोल मिलेगा
- कंपनियों में रिफंड और शुल्क समायोजन पर वैधानिक विवाद बढ़ सकता है
- व्यापार समझौतों और वैश्विक साझेदारी के ढांचे में नए समीकरण बनेंगे
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह फैसला न केवल अमेरिका की आंतरिक व्यापार नीति पर असर डालेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संरचना में फेरबदल का संकेत भी देगा।
निष्कर्ष
20 फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति की एकतरफा आर्थिक शक्तियों की सीमा है, और कांग्रेस की अनुमति बिना व्यापक टैरिफ लागू नहीं किए जा सकते। यह न केवल अमेरिका के संविधान की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक व्यापार नीति को भी एक नए आयाम पर ले जाता है।
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भारत जैसे देशों के लिए यह व्यापार की बुलंदी और अवसर को नयी दिशा देने का अवसर है, लेकिन आगे की नीति, समझौते और वाणिज्यिक हल कैसे विकसित होंगे, यह अब वैश्विक मंच पर देखा जाएगा।