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उत्तराखंड के पास मौजूद है लता जी का बेशकीमती तोहफा, पढ़ें पूरी खबर

वर्ष 1988 में गढ़वाली फिल्म रैबार के लिए मन भरमैगे बोल वाला गीत गाया था। उन्होंने वर्ष 1988 में रिकार्ड कराया था।

By इंडिया वॉइस 
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Lata Mangeshkar Psses Away : भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन पर पूरे देश के साथ ही उत्तराखंड भी गमजदा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना संगीत के साथ देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

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मन बहुत दु:खी और व्यथित है – सीएम धामी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्वर कोकिला के नाम से मशहूर लता जी का हमारे बीच से जाना गीत, संगीत और साहित्य के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे गीतों के जरिए राष्ट्रप्रेम के साथ हर क्षेत्र और वर्गों में जो भाव भर गई हैं वो हमेशा याद किए जाएंगे। उनके निधन से मन बहुत दु:खी और व्यथित है। भगवान से प्रार्थना है कि लता ताई को अपने श्री चरणों में स्थान देने के साथ उनके परिवार को संबल प्रदान करे।

उत्तराखंड के पास है लता जी का बेशकीमती तोहफा 

जहां एक तरफ लता जी के निधन की खबर से पूरा देश शोकाकुल माहौल में डूबा हुआ है वहीं देवभूमि के लोग लता जी द्वारा मिले एक बेशकीमती तोहफे को याद कर रहे हैं। दरअसल उत्तराखंड के पास लता जी के बेशकीमती तोहफे के तौर पर वो गढ़वाली गीत ‘मन भरमैगे’ मौजूद हैं, जिसे उन्होंने वर्ष 1988 में रिकार्ड कराया था।

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फिल्म रैबार के इस गीत को लता जी ने इस कदर खूबसूरत ढंग से गाया था कि कहीं से पता नहीं चलता कि गढ़वाली बोली-भाषा न जानने वाली किसी गायिका ने इस गीत को गाया है। इस गीत को रिकार्ड कराने से पहले उन्होंने चार घंटे तक इस गीत पर मेहनत की थी। उन्हें जो फीस दी गई, उन्होंने स्टूडियो में ही एक एनजीओ के प्रतिनिधियों को बुलाकर उसे दान कर दिया था।

1990 में रिलीज हुई रैबार फिल्म

लता जी से रैबार फिल्म के इस गीत के लिए निर्माता किशन एन पटेल ने अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। यह गाना देवी प्रसाद सेमवाल ने लिखा था, जिसका संगीत कुंवर बावला ने तैयार किया था। संगीतकार कुंवर बावला बताते हैं-रैबार फिल्म 1990 में रिलीज हुई, लेकिन दो साल पहले ही 1988 में इस गीत को रिकार्ड करा लिया गया था। जिस दिन गाने की रिकार्डिंग होनी थी, उस दिन उत्सव का सा माहौल था।

गढ़वाली के एक-एक शब्द का अर्थ समझने के बाद रिकॉर्ड किया गीत 

हर कोई लता जी का सानिध्य अनुभव करना चाहता था। लता जी चार घंटे तक स्टूडियों में रहीं। संगीतकार कुंवर बावला के अनुसार-लता जी ने रिहर्सल के दौरान साफ कह दिया था कि वह जहां भी गलत गाएं, उन्हें जरूर टोक दिया जाए। गढ़वाली के एक-एक शब्द का अर्थ उन्होंने तसल्ली से समझा और इसके बाद उसे बेहतरीन ढंग से गा दिया।

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कुंवर बावला के अनुसार-लता जी जितनी महान गायिका थी, उतनी अच्छी इंसान थीं। चार घंटे तक वह स्टूडियों में रहीं और इस दौरान हर किसी से उन्होंने बहुत अच्छे से बात की। उन्हें जो फीस दी गई, उन्होंने उसे स्टूडियों में ही बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाले एक एनजीओ के प्रतिनिधियों को दे दिया।

 

हिन्दुस्थान समाचार

 

 

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