लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की मौत और 12 से अधिक घायल हो गए। करंट की अफवाह के बाद मची अफरा-तफरी से हादसा हुआ।✍️ अरविंद कुमार
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बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग घायल हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। यह हादसा एक बार फिर सवाल छोड़ गया है कि धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कितनी तैयार रहती है।
17 अगस्त की सुबह अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे। सुबह करीब 6:30 बजे अशोक धाम स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर अचानक अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में भगदड़ की स्थिति बन गई। कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और भीड़ में दब गए। इस हादसे में सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 से अधिक लोग घायल हैं।
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, रात में रास्ते पर बिजली का पोल गिरा हुआ था। सुबह श्रद्धालुओं के बीच यह बात फैल गई कि पोल में करंट आ गया है। अफवाह फैलते ही लोग घबराने लगे और सुरक्षित जगह की ओर भागने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान बैरिकेडिंग टूट गई और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते भगदड़ मच गई और कई लोग एक-दूसरे के नीचे दब गए।
हादसे में जान गंवाने वालों में बड़हिया की मधुबाला देवी और मनमाला देवी, मुंगेर के सफिया सराय की रिंकू देवी तथा लखीसराय के प्रतापपुर हलसी की हेमलता देवी शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार मृतकों में सभी महिलाएं हैं। किसी परिवार ने मां खोई है तो किसी ने पत्नी। सावन में भगवान के दर्शन की उम्मीद लेकर निकली इन महिलाओं की मौत ने कई घरों को अचानक मातम में बदल दिया।
अशोक धाम में सावन के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी सुबह से ही रास्तों पर भारी भीड़ थी। बताया गया कि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ रास्ते पर दबाव बढ़ता गया। ऐसे में एक अफवाह ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
यह पहला मौका नहीं है जब अशोक धाम में भीड़ के कारण ऐसी स्थिति बनी हो। वर्ष 2019 में भी जलाभिषेक के दौरान अफवाह के बाद भगदड़ मची थी। उस घटना में एक श्रद्धालु की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। पुराने हादसे के बावजूद इस बार फिर भीड़ के बीच अफरा-तफरी का जानलेवा रूप लेना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अशोक धाम हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की मौत की खबर से उनका मन व्यथित है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने की बात कही।
अशोक धाम की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सावन में भारी भीड़ आने की जानकारी पहले से होती है, तो ऐसी स्थिति से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत थी? बिजली के गिरे पोल की स्थिति, अफवाहों को रोकने की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, आने-जाने के रास्ते और मेडिकल सहायता इन सभी पर गंभीरता से विचार जरूरी है।
अशोक धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। लेकिन आस्था के रास्ते पर किसी परिवार को अपने प्रियजन की अर्थी लेकर लौटना न पड़े, यह जिम्मेदारी भी व्यवस्था की ही है। सात मौतें सिर्फ एक संख्या नहीं हैं। इनके पीछे सात परिवार हैं, जिनकी जिंदगी अब पहले जैसी नहीं रहेगी। अगर इस हादसे से भी सबक नहीं लिया गया, तो अगली भीड़ में फिर कोई अफवाह जिंदगी से बड़ी साबित हो सकती है।
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