Devdutt Padikkal : श्रीलंका के खिलाफ जारी पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतकीय पारी खेली।
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Devdutt Padikkal : श्रीलंका के खिलाफ जारी पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतकीय पारी खेली। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 167 रनों की शानदार पारी खेलने के बाद कहा कि यह उनके लंबे समय से देखे गए सपने के सच होने जैसा है।
पडिक्कल ने बताया कि इंटरनेशनल मंच पर इस खास पल को हासिल करने के लिए उन्होंने पर्दे के पीछे दो साल तक कड़ी मेहनत की थी। गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में बारिश से प्रभावित दूसरे दिन पडिक्कल ने 131 रन के अपने कल के स्कोर से आगे खेलते हुए श्रीलंका के खिलाफ 167 रन की शानदार पारी खेली, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है।
दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 9 विकेट खोकर स्कोरबोर्ड पर 460 रन लगा दिए हैं। ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में पडिक्कल ने कहा, “बिल्कुल, मैंने इस पल का सपना देखा था। पिछले दो वर्षों से मैं बहुत मेहनत कर रहा था ताकि जब मुझे मौका मिले, तो मैं कुछ खास कर सकूं और ऐसा कर पाने पर मैं बेहद खुश हूं।”
पडिक्कल की 230 गेंदों की लंबी पारी में बेहतरीन फुटवर्क और श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक इरादा दिखा। उन्होंने 15 चौके और एक छक्का लगाया। टर्न होती गेंद का सामना करने के अपने सक्रिय रवैये पर बात करते हुए पडिक्कल ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने इस पर काफी चर्चा की है, खासकर जब आप स्पिन के खिलाफ खेल रहे हों तो यह जरूरी है कि आपके दिमाग में कुछ योजनाएं हों।”
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भारतीय बल्लेबाज ने आगे कहा, आप मैदान पर जाकर हर बार सिर्फ प्रतिक्रिया देने की उम्मीद नहीं कर सकते। यह जरूरी है कि आपके दिमाग में कुछ ऐसे शॉट्स हों जिन्हें आप मैदान पर जाते ही खेलना चाहें, ताकि आप गेंदबाज पर भी दबाव बना सकें। इसी वजह से मुझे लगता है कि पिछले एक साल या उससे अधिक समय में हमने अपनी खूबियों के आधार पर ऐसे तरीके खोजने पर काम किया है जिन्हें हम वास्तव में लागू कर सकें और विरोधी पर दबाव बना सकें।”
पडिक्कल का शानदार फुटवर्क उनकी पारी की सबसे खास बात रही। जब उनसे कहा गया कि इससे गेंद की लेंथ को समझने में उनके जबरदस्त आत्मविश्वास का पता चलता है, तो उन्होंने सहमति जताई। “बिल्कुल, मुझे लगता है कि जब आपको इस बात की स्पष्टता होती है कि आप क्या करना चाहते हैं, तो इससे आपके फुटवर्क में भी आत्मविश्वास आता है। मुझे लगता है कि मैं बस यह पक्का करना चाहता था कि मैं जो भी करूं, उसमें 100 प्रतिशत मन लगाकर खेलूं। भले ही वह डिफेंसिव शॉट हो, मैं चाहता था कि उसे पूरे भरोसे के साथ खेलूं, और इसी वजह से मेरा फुटवर्क काफी बेहतर हो गया।”
अपने राज्य कर्नाटक की शानदार बैटिंग परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पडिक्कल ने 100 रन पूरे करने के बाद अपना विकेट नहीं गंवाया और उसे 150 से ज्यादा के स्कोर में बदला, जिससे भारत 460/9 का स्कोर बना पाया।
लंबी पारी खेलने की अपनी काबिलियत के बारे में बात करते हुए पडिक्कल ने कहा कि अहम बात यह है कि कोई उपलब्धि हासिल करने के ठीक बाद भी टिके रहा जाए। “सच कहूं तो यह बस और रन बनाने की भूख है। मुझे बस वहां बैटिंग करने में मजा आता है, और जैसे ही आप 100 रन पर पहुंचते हैं, तो आराम महसूस करना और राहत मिलना आसान होता है। हालांकि, मेरे लिए जरूरी है कि अगले 20-30 बॉल वाला फेज बहुत अहम होता है, जिसमें मैं पूरी तरह फोकस्ड रहने और वहीं बने रहने की कोशिश करता हूं।”
बाएं हाथ के बल्लेबाज ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि जब मैं 100 रन के बाद शुरुआती 10 बॉल खेल लेता हूं, तो मेरा काम बहुत आसान हो जाता है। इतने वर्षों में मैंने कई क्रिकेटर्स को बड़े रन बनाते और बड़ी सेंचुरी लगाते देखा है, खासकर कर्नाटक में, तो उन्हें बैटिंग करते हुए देखकर मेरा भी मन करता है कि मैं भी वैसा ही करूं।”
उमस भरे मौसम में बारिश से बाधित मुश्किल पारी के बाद सेंचुरी लगाने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी करियर की इस यादगार पारी का जश्न मनाने के लिए कोई खास योजना नहीं बनाई थी। उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ नहीं। मुझे लगता है कि मैं थक गया हूं, इसलिए अब बस सोने जा रहा हूं।”
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