Delhi : विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरने की तैयारी कर रहा है। इंडिया गठबंधन की 30 सितंबर को बैठक होगी। इसी बीच कांग्रेस की मंगलवार को (कांग्रेस वर्किंग कमेटी) CWC की बैठक हुई।✍️Avinay Mishra
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Delhi : विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरने की तैयारी कर रहा है। इंडिया गठबंधन की 30 सितंबर को बैठक होगी। इसी बीच कांग्रेस की मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई। इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि ‘आज की बैठक उससे भी महत्वपूर्ण है, फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है। हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नीव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को मोदी सरकार ने 12 सालों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।’
उन्होंने कहा कि ‘साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस सोच और भावना के विपरीत है, जिसके तहत यह तय किया गया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो और हर वोट की निष्पक्ष गिनती हो।’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ‘मैं राहुल गांधी जी को बधाई देना चाहूंगा, क्योंकि उन्होने सबसे पहले जिन-जिन बातों को उठाया वे प्रामाणिक रूप से सही साबित हुए हैं। ये बात देश के लोग मान रहे हैं। राहुल जी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के मामले में दस्तावेजों के साथ मतदाता आंकड़ों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए था। डुप्लीकेट मतदाताओं, डबल एड्रेस, एक ही एड्रेस पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और फॉर्म-6 से जुड़ी एंट्री को लेकर उन्होंने जो तथ्य रखे थे। उस दिशा में चुनाव आयोग ने थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज वो कठघरे में नहीं होते और उनकी विश्वसनीयता बची रहती।’
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस मुद्दे पर देश भर में प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में भी उठाएगी। कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची में बदलावों का डेटा सार्वजनिक हो। राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित डेटा सिंपल फॉर्मेट में मिले। जहां गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता हो। कोई भी पक्ष यह न कह पाए कि जानकारी छिपाई गई।
✍️Avinay Mishra
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