Mohan Bhagwat : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शनिवार को अमेरिका के न्यूयॉर्क में 'एक दुनिया, एक मानवता' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।✍️Avinay Mishra
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Mohan Bhagwat : मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि अंतिम सत्य की खोज करना ही हमारा उद्देश्य है, जिसे हम अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। विज्ञान आजकल उसे ‘कॉन्शियसनेस’ यानी चेतना कहता है। आरएसएस प्रमुख अमेरिका के न्यूयॉर्क में ‘एक दुनिया, एक मानवता’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मोहन भागवत ने कहा कि अगर मैं आपको किसी चीज की ओर इशारा करके कहूं कि वहां रोशनी है तो आप पहले मेरी उंगली को देखेंगे और फिर उस रोशनी को देखेंगे, लेकिन अगर आप मेरी उंगली को ही देखते रहेंगे और उसी पर अटके रहेंगे तो आप उस रोशनी को कभी नहीं देख पाएंगे, तब उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
मोहन भागवत ने कहा कि हमें सत्य की उस राह पर चलना है, लेकिन हमें यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि लक्ष्य एक है और रास्ते अनेक हैं। हमारी परंपरा में कहा गया है कि धरती पर गिरने वाला हर पानी अंततः समुद्र तक पहुंचता है। रास्ते अलग-अलग हैं। कुछ सीधे हैं, कुछ घुमावदार हैं। कुछ रास्ते दूसरों से लंबे हैं, कुछ छोटे हैं। कुछ बहुत अच्छी तरह बनाए गए रास्ते हैं और कुछ सिर्फ जंगल के रास्ते हैं। रास्ते अलग होना स्वाभाविक है और अलग-अलग रास्ते हमारी धारणाओं में अंतर की वजह से होते हैं, लेकिन सभी रास्ते उसी दिव्यता, उसी ईश्वर या उस सत्य तक पहुंचने के लिए हैं।
New York, US: RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat says, “… Through that, our nation was created. No nation is a geographical piece of land. All nations have a destiny to fulfill. This is the Bharat destiny. Let us awake, as Bharatiyas, to that destiny and fulfill our duties in our… pic.twitter.com/xg4KQ8ywDH
— IANS (@ians_india) August 29, 2026
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मोहन भागवत ने कहा कि हमारे यहां सभी संप्रदायों के लोगों के लिए परंपरागत रूप से स्थान रहा है। भारत ने हमेशा हर किसी को आश्रय देने की कोशिश की है। दुनिया में जिन्हें सुरक्षित स्थान नहीं मिला, उन्होंने यहां आकर शरण ली, लेकिन इन सब चीजों के कारण कुछ परेशानियां और अस्थिरताएं भी पैदा हुई हैं।”
उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत सारे धर्म हैं। आज की दुनिया में धर्मों की पहचान काफी हद तक उनके रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों से होती है। किसी धार्मिक अनुशासन में शामिल होने और उस रास्ते पर चलते हुए दिव्यता तक पहुंचने के लिए इन रीति-रिवाजों और अनुशासन का पालन करना भी जरूरी है, लेकिन हर धर्म हमें कहां ले जा रहा है? वह हमें उसी अंतिम सत्य की ओर ले जा रहा है।
✍️Avinay Mishra
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