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पहलः वाराणसी के काशी विद्यापीठ में बनेगा राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त शोधपीठ, जयंती पर राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान को सराहा

यूपी के वाराणसी में स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में संस्थापक राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त शोधपीठ की स्थापना की जाएगी। यह घोषणा बुधवार को कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की।

By Rajni 

Updated Date

वाराणसी। यूपी के वाराणसी में स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में संस्थापक राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त शोधपीठ की स्थापना की जाएगी। यह घोषणा बुधवार को कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की। वह बुधवार को संस्थापक की 140 वीं जयंती पर डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे।

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शिवप्रसाद गुप्त मिशन की ओर से आयोजित राष्ट्र निर्माण में राष्ट्ररत्न का योगदान विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में राष्ट्ररत्न ने अतुलनीय योगदान दिया हैं। शिवप्रसाद गुप्ता जी एक महान दानवीर थे। साथ ही साथ वे वचन के पक्के थे। उनका जीवन संघर्ष भरा था। जिनके दिए दान को कोई भी तौल नहीं सकता है। उन्होंने अमूल्य दान किया है।

काशी विद्यापीठ मे बनने वाले शोधपीठ के जरिए उनके वैचारिक विरासत को संजोकर वैश्विक फलक पर पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नये सत्र में स्मारिका ग्रंथ प्रकाशन के लिए शोधार्थियों से आलेख आमंत्रित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन शिवप्रसाद गुप्त स्मारिका ग्रंथ को देश-विदेश के पुस्तकालयों में भेजेगा। केंद्रीय पुस्तकालय में संस्थापक की स्मृतियों को संजोने के लिए राष्ट्ररत्न वीथिका (फाउंडर मेमोरियल गैलरी) बनाई जाएगी।

राष्ट्ररत्न के योगदानों पर होगा शोध 

उन्होंने इसकी जिम्मेदारी छात्र अधिष्ठाता प्रो. केके सिंह और कुलानुशासक प्रो. अमिता सिंह को दी। इस दौरान उन्होंने विभाग प्रमुखों से शिक्षा, स्वास्थ्य  साहित्य, समरसता, सौर विज्ञान पत्रकारिता, राजनीति, अर्थशास्त्र आदि क्षेत्रों में राष्ट्ररत्न के योगदानों पर शोध कराने को कहा।

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इसके पहले मुख्य अतिथि राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त के प्रपौत्र डॉ. अंबुज गुप्ता ने कहा कि दादा जी (बाबू शिव प्रसाद गुप्त) नारी स्वावलंबन के पक्षधर थे। पर्दा प्रथा के खिलाफ थे। उन्हीं की प्रेरणा से मां ( राष्ट्ररत्न की बहू) ने काशी में चादर छोड़ो अभियान शुरू किया था।

विशिष्ट अतिथि डॉ पुष्कर रंजन (डॉ भगवान दास के प्रपौत्र) ने राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त काशी के द्वारपाल थे। काशी आने वाले हर अतिथि का आत्मीयता से सत्कार करते थे।

करुणा और दानशीलता ही पहचान थी

विशिष्ट वक्ता काशी विद्यापीठ की कुलानुशासक प्रो. अमिता सिंह ने कहा कि राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त का व्यक्तित्व विराट था। करुणा और दानशीलता उनकी पहचान थी। राष्ट्रीय आंदोलनों में उन्होंने तन-मन-धन से सहयोग किया। कहा कि उनके ज्ञान-दान को कोई तौल नहीं सकता हैं।

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