Shardiya Navratri 2022: नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तजन माँ के अलग-अलग रूपो की पूजा अर्चना करते है,जिसमें से पहले दिन दुर्गा मां के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है,इस दिन भक्त लोग अपने घरो मे कलश स्थापना करते है और व्रत रखते है,वही आज दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती हैं ,माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा पाने के लिए लोग अलग-अलग तरीके से प्रसन्न करते है,मान्यता है की माँ ब्रह्मचारिणी संसार में ऊर्जा का प्रवाह करती है, मां ब्रह्माचारिणी की कृपा से मनुष्य को आंतरिक शांति प्राप्त होती है, माँ ब्रह्माचारिणी की कृपा पाने के लिए इस मंत्र का जप करे “कृपाब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।।”
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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है, दूसरे दिन की शुरुआत 27 सितंबर को 03:09 AM से ही रही है, जो कि अगले दिन 28 सितंबर को 02:28 AM तक है,माँ पार्वती का ही दूसरा नाम ब्रह्मचारिणी हैं,राजा हिमालय के घर पुत्री स्वरूप में जन्मी माता पार्वती को ही मां ब्रह्मचारिणी कहते हैं. भगवान शिव को पति स्वरूप में पाने के लिए इन्होंने कठोर साधना, जप और तप की. इस वजह से ही देवी का नाम ब्रह्मचारिणी है
आज नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें. उनको चमेली का फूल, अक्षत्, फल, धूप, दीप, गंध आदि अर्पित करें. माता को सेब, पान का पत्ता, सुपारी, चनी और मिश्री का भोग लगा सकते हैं. पूजा के समय मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का उच्चारण करते रहें. मां ब्रह्मचारिणी की कथा पढ़ें और अंत में विधिपूर्वक मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें.
मां ब्रह्माचारिणी की कथा
एक बार नारद जी ने देवी पार्वती को उनके जन्म का उद्देश्य समझाया. तब माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति स्वरूप में पाने की प्रण लिया. इसके लिए वे घने जंगल में जाकर एक गुफा में रहने लगीं और शिव प्राप्ति के लिए कठोर तप और साधना में जुट गईं.इन्होंने हजारों वर्षों तक भगवान शिव की पूजा की. उनको प्रसन्न करने के लिए आंधी, तूफान, मूसलाधार वर्षा, तेज धूप हर प्रकार की विकट परिस्थितियों का समाना किया. लेकिन वे अपने मार्ग से विचलित नहीं हुईं.उनकी इस साधना को देकर ऋषि-मुनि भी आश्चर्यचकित थे. देवी ने कई साल तक बेलपत्र खाए, तो कभी शाक पर ही दिन व्यतीत किए. उन्होंने कई वर्षों तक उपवास और तप किया, जिसके कारण उनका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया.शिव की साधना में लीन रहने वाली इस देवी ने कठोर ब्रह्चर्य के नियमों का पालन किया. उनकी इस जीवटता और दृढ़ निश्चय के कारण उनको मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है.