Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और आरएसएस पर निशाना साधा।✍️Avinay Mishra
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Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने देश में दलितों के साथ कथित भेदभाव और अत्याचार के मुद्दे पर बात की। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में आज भी दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है। एक तरफ संविधान है, जबकि दूसरी तरफ भाजपा और आरएसएस की विचारधारा है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत का संविधान डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है। देश में मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को इसी वैचारिक टकराव के रूप में देखा जाना चाहिए। संविधान ने छुआछूत और भेदभाव को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन समाज के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं अब भी देखने को मिलती हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि कुछ स्कूलों में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और उनसे झाड़ू-पोछा कराया जाता है। ऐसी घटनाओं का बच्चों के मानसिक विकास और आने वाली पीढ़ियों की सोच पर गंभीर असर पड़ता है।
उन्होंने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं दी जाती और उन्हें अलग व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनके मुताबिक, कुछ दुकानों पर कथित तौर पर अलग – अलग चाय के कप रखे जाते हैं। दलितों के लिए ऐसे कप होते हैं, जो इस्तेमाल करके फेंक दिए जाते हैं। अन्य लोगों के लिए कांच के कप इस्तेमाल किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर दलित दूल्हों को घोड़े पर बैठने से रोका जाता है और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। यह केवल किसी एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के शहरों और गांवों में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं।
उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण के मामले पर बात की। राहुल गांधी ने कहा कि खड़गे ने अपना पूरा जीवन देश और संविधान को समर्पित किया है और उनके साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर मामला है। अगर किसी व्यक्ति के मंदिर जाने के बाद परिसर का ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है तो इसका अर्थ यही है कि उस व्यक्ति को अशुद्ध माना जा रहा है। भारतीय संविधान में छुआछूत को अपराध घोषित किया गया है।
उन्होंने कहा कि घटना को करीब 20 दिन बीत चुके हैं और जिन लोगों ने कथित तौर पर यह कृत्य किया, उनके खिलाफ जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा केवल अतीत की समस्या नहीं है। संविधान ने भले ही छुआछूत और भेदभाव को कानूनी रूप से खत्म किया हो, लेकिन सामाजिक स्तर पर इसके अवशेष अब भी मौजूद हैं। देश की राजनीति में संविधान और उनकी विचारधारा के बीच संघर्ष जारी है।
✍️Avinay Mishra
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