Uttarakhand : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए 'शुद्धिकरण' विवाद पर बयान दिया।
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Uttarakhand : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस रस्म में शामिल लोग भारतीय जनता पार्टी के न तो पदाधिकारी थे और न ही कार्यकर्ता। मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा कि जिन लोगों ने शुद्धिकरण की रस्म निभाई, वे भाजपा के कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता नहीं हैं, लेकिन उत्तराखंड में कोई नहीं जानता कि खड़गे की जाति क्या है।
उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण कार्यक्रम धार्मिक संगठनों ने रामलीला स्थल पर धार्मिक रूप से भड़काऊ नारे लगाने और कथित तौर पर अपवित्र करने की घटना के विरोध में आयोजित किया था। वहां जिस तरह धार्मिक कट्टरता वाले नारे लगाए गए और अपवित्रता फैलाई गई। वह एक पवित्र जगह है, एक धार्मिक स्थल है जहां रामलीला का मंचन होता है। बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। ऐसे आयोजनों में जो अपवित्रता हुई, धार्मिक कट्टरता के जो नारे लगाए गए और ये सब एक खास धर्म के लोगों ने किया।
उन्होंने सवाल किया कि इसके विरोध में धार्मिक संगठनों ने शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। अब वे बेवजह के मुद्दे उठा रहे हैं, आप लोग खुद हल्द्वानी से हैं। आप इसके गवाह हैं। उत्तराखंड में आज कौन मानेगा कि यहां जातिगत भेदभाव मौजूद है।
सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की पहलों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इसका दृष्टिकोण समान विकास और समावेश पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान प्रमुख दलित नेताओं के साथ हुए व्यवहार को भी याद किया, जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी, पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम और डॉ. भीमराव अंबेडकर का जिक्र किया।
उन्होंने उस समय को याद किया जब सीताराम केसरी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे और कहा कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया, उन्हें कैसे कार्यालय से बाहर निकाला गया। बाबू जगजीवन राम और डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ क्या किया गया? उन्हें कभी भारत रत्न नहीं मिलने दिया गया, न ही उन्हें संसद में प्रवेश करने दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी चुनावी फायदे के लिए इस विवाद के इर्द-गिर्द एक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है और अब वे वोटों के लिए ऐसा नैरेटिव बनाना चाहते हैं। मेरा मानना है कि न सिर्फ उत्तराखंड में, बल्कि देश के हर व्यक्ति को यह अच्छी तरह पता चल गया है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, न तो खड़गे के खिलाफ और न ही कांग्रेस पार्टी के खिलाफ।
उन्होंने कहा कि यहां के लोग एक बार खुद आगे आए थे और धार्मिक उन्माद के खिलाफ कार्यक्रम आयोजित किया था। और खड़गे उसमें बहुत अहम भूमिका में थे। वे एक सम्मानित नेता हैं, कई राज्यों के मंत्री और मुख्यमंत्री उनके साथ खड़े हैं। वे खुद कह रहे थे कि उन्होंने अटल, आडवाणी के साथ और उनके समय में भी काम किया है। उत्तराखंड के लोगों ने ऐतिहासिक रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों का स्वागत किया है और इस बात को नकारा कि वे जाति या पहचान के आधार पर जानबूझकर किसी का अपमान करेंगे।(आईएएनएस)
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