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‘घुसपैठ रोकना जरूरी, बीएसएफ को जमीन देने में हुई देरी…’, सिलीगुड़ी में बोले अमित शाह

Amit Shah in West Bengal : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर निशाना साधा।

By HO BUREAU 

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Amit Shah in West Bengal : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए जमीन उपलब्ध कराने की लगातार अपील की थी, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई।

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उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर सुवेंदु अधिकारी ने बीएसएफ और एसएसबी को 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी। यह तेजी इसलिए नहीं है कि सरकार भाजपा की है, बल्कि इसलिए है, क्योंकि सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीरता है। जब तक घुसपैठ पर रोक नहीं लगती, तब तक पश्चिम बंगाल और भारत दोनों पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकते। देश की सुरक्षा के लिए मजबूत सीमा प्रबंधन जरूरी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह खुद एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यालय गए थे और उन्हें समझाया था कि मांगी जा रही जमीन बीएसएफ के लिए है, भाजपा के लिए नहीं। इसके बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जमीन नहीं दी, जिसकी वजह से हम काम नहीं कर पा रहे थे।

‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन देश और दुनिया ने सुना

सिलीगुड़ी में बीएसएफ के फ्रंटियर हेडक्वार्टर की प्रशासनिक इमारत के लिए अमित शाह द्वारा आधारशिला रखे जाने की तैयारी है। इसके अलावा जलपाईगुड़ी में बीएसएफ की 12वीं और 19वीं बटालियन तथा एक ट्रांजिट कैंप से जुड़ी आवासीय और गैर-आवासीय परियोजनाओं के लिए ई-आधारशिला कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इन कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां जारी हैं।

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उन्होंने कहा कि 2015 से वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से ध्वजारोहण कार्यक्रम में लगातार शामिल होते रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस उनके लिए अलग रहा, क्योंकि 150 वर्ष पूरे होने और आजादी के 80 वर्ष के अवसर पर लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन देश और दुनिया ने सुना।

अमित शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने के साथ देश के भविष्य को लेकर एक विचार और दृष्टि भी दी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी इस गीत को पूरे रूप में स्वीकार नहीं किया गया, जिसका उन्हें लंबे समय से दुख रहा है।

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