लखनऊ। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी पिछडे ,अति पिछड़ों का वोट हासिल करने के लिए गुरुवार को राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विमुक्ति दिवस मना रही है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी मौजूद रहे।
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देश आजादी का अमृत महोत्सव बना रहा है और आजादी के 77 साल बाद भी पिछड़ेपन का दंश झेल रही उत्तर प्रदेश की 152 जातियों को एकजुट करने और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने विमुक्ति दिवस समारोह का आयोजन किया। इस समारोह के माध्यम से प्रदेश की लगभग 18 प्रतिशत आबादी को एकजुट करने और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया जाएगा।
देशभर में सबसे अधिक विमुक्ति में शामिल जातियां यूपी में हैं। जिसमें राजभर, लोध, केवट, मल्लाह, सोनकर, पारसी, वनवासी, वनटांगिया, बिंद, निषाद, गोंड, दलित, पासी सोनकर,पढ़क, खुरपलटा, मोंगिया , कुजबंधिया, सिगीवाला, औघड़, बैरिया, वैद, भाट, चमरमगता, जोगी, कपड़िया, महावत, कुलन्दर फकीर, नट अथवा करनाटक, करबल, बावरिया, बासी, हबूडा, डोम, खटिक, बंजारा, बहेलिया, गोदावर, बरवार, भुर्जी, सेपरा , सिंगलीगार, बेलदार, मदारी, कंकाली, बृजवासी, जोगा, किंगिरिया, भतरी, कुरमंगिया , कनमैलिया, गोसाई, लोना चमार और घोशियान समेत 152 जातियां विमुक्ति में शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने विमुक्ति दिवस समारोह मनाने को लेकर बताया कि 1871 में जिन जातियों को अंग्रेजों ने क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट बनाकर पाबंद किया वो सब इसमें आती हैं।
देश की आज़ादी के बाद 1952 में सरदार पटेल ने पहल की और क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट से मुक्ति मिली। इसलिए इन्हें विमुक्ति कहा गया। इनकी बहुत बड़ी आबादी है। यह वह जातियां हैं जिन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेने का काम किया। देश की आजादी में जिनका बहुत बड़ा योगदान है। सीएम योगी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ा विषय उठाया है।