Jharkhand : झारखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया नियुक्ति मॉडल तैयार किया है।✍️विश्वजीत भट्ट
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Jharkhand : झारखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया नियुक्ति मॉडल तैयार किया है। राज्य में पीजी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण अब दूसरे राज्यों, खासकर दक्षिण भारत से चिकित्सकों को लाने की तैयारी है। डॉक्टरों की नियुक्ति बिडिंग मॉडल के जरिए होगी।
विभाग का लक्ष्य अगले तीन से चार महीने में करीब 1000 डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक दूर करना है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के मुताबिक रांची के बाहर अधिकांश जिलों और खासकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नई व्यवस्था में डॉक्टर यह तय कर सकेंगे कि उन्हें किस जिले या अस्पताल में सेवा देनी है। इसके साथ ही वे अपनी सेवा के लिए अपेक्षित पैकेज भी बता सकेंगे। विभाग का मानना है कि सभी जिलों में एक समान मानदेय रखकर डॉक्टर उपलब्ध कराना मुश्किल है। रांची में 50 से 70 हजार रुपये के पैकेज पर तैयार डॉक्टर दूरदराज के जिलों में काफी ज्यादा मानदेय की मांग करते हैं। अजय कुमार सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई डॉक्टर रांची में इस पैकेज पर काम करने को तैयार हो सकता है, लेकिन साहिबगंज जैसे जिले में तीन लाख रुपये में भी काम करने को तैयार नहीं होता।
राज्य के कई प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अभी मुख्य रूप से एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं। स्त्री रोग, शिशु रोग और सर्जरी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं के लिए मरीजों को जिला अस्पताल या बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत जरूरत के हिसाब से पीजी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती सीएचसी और पीएचसी तक की जा सकेगी। इससे मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और इलाज मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों के साथ अस्पतालों में जरूरी उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रहा है। कई जिला अस्पतालों में ऑपरेशन की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। विभागीय समीक्षा में कई जगह मोतियाबिंद के फेको ऑपरेशन शुरू होने की जानकारी सामने आई है। लेप्रोस्कोपी और एंडोस्कोपी का विस्तार किया जा रहा है। वहीं कई सीएचसी में डायलिसिस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से इन सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी।
✍️विश्वजीत भट्ट
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