India Alliance : CEC ज्ञानेश कुमार विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने आयोग को घेरने की तैयारी कर ली है। इंडिया गठबंधन की 30 सितंबर को बैठक हो सकती है।✍️Avinay Mishra
Updated Date
India Alliance : CEC ज्ञानेश कुमार विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने आयोग को घेरने की तैयारी कर ली है। इंडिया गठबंधन की 30 सितंबर को बैठक हो सकती है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस बैठक में सभी दल के नेता शामिल हो सकते हैं। इसमें इलेक्शन कमीशन, वोटर लिस्ट और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। कई विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की है। हाल की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की खबरें सामने आई हैं।
रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस का कहना है कि ज्ञानेश कुमार को त्यागपत्र देना चाहिए और सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। कांग्रेस कार्य समिति की 29 सितंबर को बैठक होगी। इसी मुद्दे पर चर्चा होगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट हो गए हैं। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और माकपा एक साथ खड़ी नजर आ रही हैं। ममता बनर्जी ने सीपीएम महासचिव एमए बेबी से फोन पर बात की, वहीं CPI महासचिव एम ए बेबी ने इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने बैठक बुलाने का अनुरोध किया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना फैसले लिए गए थे।
CEC विवाद पर राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ‘हम सरकार के कामकाज को समझ सकते हैं, लेकिन हम यह नहीं समझ सकते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है। सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में यह नहीं होती। इस धरती पर ऐसी कोई डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) नहीं है, जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो।’
राहुल गांधी ने कहा था कि ‘मैं आपको ये वीडियो इसलिए दिखा रहा हूं, क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज़्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं। लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता, क्योंकि भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) नाम की एक बुनियादी ताकत होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को नहीं बख्शती।’
ममता बनर्जी ने कहा कि अब यह साबित हो गया है कि भाजपा और चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लूट लिया। ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर बने रहने तक देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं।
✍️Avinay Mishra
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।