Modi Cabinet ने ₹13,041 करोड़ की 5 रेलवे-हाईवे परियोजनाओं को मंजूरी दी। बिहार में 83 किमी 4-लेन हाईवे समेत रेल कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।✍️अरविंद कुमार
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नई दिल्ली | 19 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चार रेलवे परियोजनाओं और एक 4-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। इन पांचों परियोजनाओं पर कुल 13,041 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की जानकारी दी।
कैबिनेट ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा 4-लेन हाईवे परियोजना को मंजूरी दी है। 83 किलोमीटर लंबे इस ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट पर 3,591 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह कॉरिडोर नेपाल सीमा के पास सोनवर्षा से जुड़ते हुए बिहार में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा।
रेलवे क्षेत्र में खड़गपुर-भद्रक के 173 किलोमीटर लंबे सेक्शन को चार-लेन यानी क्वाड्रुपल रेल कॉरिडोर में बदलने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 3,352 करोड़ रुपये है। इस रूट पर कोयला और आयरन-ओर की भारी माल ढुलाई के साथ बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों का संचालन होता है।
भद्रक-हरिदासपुर के 75 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन पर चौथी लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना पर करीब 1,533 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी और कटक क्षेत्र में ट्रेनों की आवाजाही से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना से हर साल करीब 433 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स लागत की बचत होने का अनुमान है।
गुम्मिडीपुंडी-गुडूर के करीब 90 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन को भी क्वाड्रुपल रेल कॉरिडोर में बदला जाएगा। परियोजना की लागत करीब 2,229 करोड़ रुपये है। इससे इस व्यस्त रूट पर अतिरिक्त यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी।
कटक-पारादीप रेल परियोजना को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, माल यातायात का सड़क से रेल की ओर शिफ्ट होने से करीब 90 फीसदी CO₂ उत्सर्जन बचाने में मदद मिल सकती है।
इस परियोजना से करीब 61 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही झारखंड और ओडिशा के औद्योगिक क्षेत्रों से प्रमुख बंदरगाहों तक माल ढुलाई और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
केंद्र सरकार के मुताबिक, इन पांच परियोजनाओं से देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और परिवहन कॉरिडोर मजबूत होंगे। इससे माल ढुलाई, यात्री परिवहन, रोजगार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर बिहार और ओडिशा समेत पूर्वी भारत के परिवहन नेटवर्क को इन परियोजनाओं से बड़ा फायदा मिल सकता है।
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✍️अरविंद कुमार, दिल्ली
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