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विधि की सर्वसुलभ शिक्षा व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की माँग पर विधि के छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन हुआ आयोजित

प्रयागराज में 22 राज्यों के विधि छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कानूनी शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चर्चा हुई। ✍️शोएब रिज़वी

By HO BUREAU 

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Uttar Pradesh: प्रयागराज में रविवार को विधि के छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन प्रयागराज के सरदार पटेल सेवा संस्थान, अलोपीबाग में छात्र संगठन- ए आई डी एस ओ की पहल पर आयोजित किया गया। इस कन्वेंशन में 22 राज्यों से विधि के छात्र प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी के द्वारा महापुरुषों के विचारों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करके किया गया। इसके बाद “मैं नहीं मानता” गीत प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन भाषण स्वागत समिति के सचिव राजवेंद्र सिंह एडवोकेट ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि हमारे शहर इलाहाबाद में लॉ स्टूडेंट्स का नेशनल कन्वेंशन आयोजित हो रहा है। इस कन्वेंशन में मुख्य अतिथियों में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट प्रशान्त भूषण, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस चेमलेश्वर के अलावा सी पी डी आर एस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री द्वारकानाथ रथ और ए आई डी एस ओ के महासचिव शिवशीष प्रहराज ने भी सम्बोधित किए।

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सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस चेमलेश्वर ने अपने संबोधन में कहा कि विधि की शिक्षा महंगी होती जा रही है साथ ही उसकी गुणवत्ता भी कम होती जा रही है। विधिक नैतिकता और मूल्यों का भी ह्रास हो रहा है। एक समय विधि का पेशा एक आदर्श के रूप में समाज में था पर आज भ्रष्टाचार और अनैतिक साधनों के उपयोग ने इस पेशे की गरिमा घटाई है। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का आज की न्याय व्यवस्था में हनन हो रहा है।

विधि की सर्वसुलभ शिक्षा व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की माँग पर विधि के छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन हुआ आयोजित

विधि की सर्वसुलभ शिक्षा व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की माँग पर विधि के छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन हुआ आयोजित

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट प्रशान्त भूषण ने कहा कि आज लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है सभी नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए। यह समाज में सहिष्णुता के लिए जरूरी है कि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का प्रचार प्रसार समाज में हो। आज आवाज उठाने वालों पर ही कार्यवाही हो रही है, ऐसे में नागरिक अधिकार के लिए संघर्ष जरूरी है। आज चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से लेकर तमाम संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियां सवालों के घेरे में है। इनकी विश्वसनीयता पर आज जनता सवाल उठा रही है। एस आई आर की प्रक्रिया को जबरन थोपकर करोड़ो पात्र वोटरों के नाम काटे गए हैं। नौजवान वकीलों और विधि छात्रों को विधिक नैतिकता और लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए आगे आना होगा।

मानवाधिकार संगठन सी पी डी आर एस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारकानाथ रथ ने कहा यह अच्छी बात है कि आज छात्र व नौजवान आंदोलन की राह पर है। हमें अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन के लिए आगे आना है। आज के माहौल में पूरे देश के अमन पसंद और लोकतांत्रिक सोच रखने वालों को इकठ्ठा होना जरूरी है। ए आई डी एस ओ के राष्ट्रीय महासचिव शिवशीष प्रहराज ने कहा कि विधिक शिक्षा का संकट केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की न्याय व्यवस्था से भी है। देश की अदालतों में काफी अधिक मामले लंबित हैं। ऐसी परिस्थिति में ऐसी कानूनी शिक्षा की आवश्यकता है, जो छात्रों को केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए तैयार न करे, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और पेशेवर नैतिकता के प्रति भी संवेदनशील बनाए। कन्वेंशन में कानून के छात्रों की शिक्षा, फीस, रोजगार, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, आधारभूत सुविधाओं तथा कानूनी पेशे में बढ़ती असमानताओं सहित कानूनी शिक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इस कन्वेंशन में शहर के गणमान्य नागरिक सहित बढ़ी संख्या में अधिवक्ता गण व आम नागरिक शामिल हुए। कन्वेंशन की अध्यक्षता ए आई डी एस ओ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एड रिम्मी बघेला द्वारा की गई। राष्ट्रीय कन्वेंशन के संदेश सस्ती कानूनी शिक्षा के लिए संघर्ष और न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कन्वेंशन का समापन हुआ।

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✍️शोएब रिज़वी

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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