बेंगलुरु। कर्नाटक विशेष जांच दल (SIT) ने फर्जी दवा रैकेट के मुचख्य आरोपी वीरश कुमार जैन से पूछताछ के दौरान पाया है।
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बेंगलुरु। कर्नाटक विशेष जांच दल (SIT) ने फर्जी दवा रैकेट के मुचख्य आरोपी वीरश कुमार जैन से पूछताछ के दौरान पाया है कि उसने कथित तौर पर पूरे नेटवर्क को संचालित किया था। यह नेटवर्क राज्यभर की मेडिकल दुकानों और निजी अस्पतालों में नकली टैबलेट, सिरप और अन्य दवाओं की आपूर्ति करता था।
जांच के अनुसार, रविवार को अपनी संपत्तियों पर हुई छापेमारी के बाद हिरासत में लिए गए जैन ने कथित तौर पर प्रशांत और अन्य लोगों को निर्देश दिए और रैकेट के संचालन को संभाला। जांचकर्ताओं को संदेह है कि आरोपियों द्वारा सप्लाई की गई नकली दवाएं 80 से अधिक मेडिकल दुकानों और निजी अस्पतालों तक पहुंचाई गईं।
नकली दवाओं की सप्लाई बेंगलुरु की कई मेडिकल दुकानों और अस्पतालों में भी कथित तौर पर की गई थी। इससे उन मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने इन नकली दवाओं का सेवन किया हो सकता है।
SIT इस नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि नकली दवाओं के निर्माण, आपूर्ति और वितरण में जैन तथा अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाया जा सके। जांचकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि इस रैकेट का सालाना कारोबार 15 करोड़ रुपये से अधिक था। SIT अब जैन से पूछताछ कर वित्तीय लेन-देन और इस अवैध कारोबार से जुड़े व्यापक नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस जैन से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने का भी प्रयास कर रही है। SIT नकली दवाओं के स्रोत, उनकी वितरण व्यवस्था और उन मेडिकल दुकानों तथा अस्पतालों की भी जांच करेगी, जहां कथित तौर पर इन दवाओं की सप्लाई की गई थी।
SIT बेंगलुरु के बाहरी इलाके में रामनगर जिले के डोड्डेरी में हाल ही में सामने आए फर्जी दवा रैकेट की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में SIT ने शुक्रवार को कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में 10 ठिकानों पर छापेमारी की।
यह कार्रवाई जारी जांच के तहत SIT और ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने संयुक्त रूप से की। तलाशी अभियान में करीब 80 से 100 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। इन टीमों ने उन कंपनियों से जुड़े कार्यालयों, संपत्तियों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिन पर नकली दवाओं के निर्माण, दोबारा पैकिंग और सप्लाई में शामिल होने का आरोप है। बेंगलुरु में लालबाग के पास मिनर्वा सर्कल स्थित एक फार्मास्युटिकल कंपनी के परिसर में भी तलाशी ली गई।
अधिकारी अलग-अलग स्थानों से कथित तौर पर मंगाई गई दवाओं की जांच कर रहे हैं, जिन्हें बाद में इस नेटवर्क के जरिए दोबारा पैक या सप्लाई किया जाता था। जांच में कथित तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया है। आरोप है कि नकली दवाओं पर लगाए जाने वाले लेबल विदेशों से मंगाए जाते थे। ये छापेमारी करीब दो सप्ताह पहले सामने आए इस रैकेट की जांच को आगे बढ़ाते हुए की गई। जांचकर्ता दवाओं की सप्लाई चेन, उनके स्रोत, निर्माण और दोबारा पैकिंग की सुविधाओं के साथ-साथ पूरे वितरण नेटवर्क की पड़ताल कर रहे हैं।(आईएएनएस)
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