Booking.com

राज्य

  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. फर्जीवाड़ाः दो जन्म प्रमाणपत्रों में फंस गए सपा नेता, आजम खां, बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फात्मा को 7 साल की सजा

फर्जीवाड़ाः दो जन्म प्रमाणपत्रों में फंस गए सपा नेता, आजम खां, बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फात्मा को 7 साल की सजा

लंबे इंतजार के बाद आखिर अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्रों के मामले में कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया। कोर्ट ने सपा नेता आजम खां, बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फात्मा को 7 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के आदेश पर तीनों को सीधे जेल भेजा जाएगा।

By Rakesh 

Updated Date

रामपुर। लंबे इंतजार के बाद आखिर अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्रों के मामले में कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया। कोर्ट ने सपा नेता आजम खां, बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फात्मा को 7 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के आदेश पर तीनों को सीधे जेल भेजा जाएगा।

पढ़ें :- हरियाणा में जल्द ही शुरू होंगी पुलिस विभाग में भर्तियाःं  डीजीपी, 20 गांवों को नशा मुक्त होने पर दिया गया सम्मानपत्र

भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में दर्ज कराया था मामला 

भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मामला दर्ज कराया था। इसमें सपा नेता आजम खां और उनकी पत्नी डा. तजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था।  पुलिस ने विवेचना के बाद मामले में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। तीनों ही लोग इस समय जमानत पर चल रहे हैं। मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में चल रहा था।

11 अक्तूबर को इस मुकदमे में अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ताओं को बहस करनी थी, लेकिन उनके द्वारा कोर्ट में स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया था, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अब्दुल्ला को आदेश दिया था कि वह 16 अक्तूबर तक लिखित बहस दाखिल कर सकते हैं। इस फैसले के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में रिवीजन दायर की गई थी, जिसे एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था।

मंगलवार को अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ताओं ने लिखित बहस दाखिल की। इसके बाद कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया।आरोप था कि अब्दुल्ला ने अपने दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाए थे। जिनमें एक रामपुर नगरपालिका परिषद से, जबकि दूसरा प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से बनवाया था। आरोप है कि उसका प्रयोग अब्दुल्ला आजम ने विधानसभा चुनाव के दौरान किया। 30 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

पढ़ें :- फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे शिक्षक भर्ती की काउंसिलिंग में पहुंचे और पकड़े गए, जानें किस बात पर कर्मचारियों को हुआ शक

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com
Booking.com
Booking.com