UP News : उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे-35 पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।✍️Sandeep
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UP News : उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे-35 पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। बदौसा में बागेन नदी पुल का एप्रोच रोड अचानक धंस गया है, जिससे सड़क पर कई फीट चौड़ी दरारें आ गई हैं। नदी उफान पर है और हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों का रूट तुरंत डायवर्ट कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर उठ रहा है।
झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-35 की यह भयावह तस्वीरें बांदा के बदौसा की हैं। बागेन नदी पर बने पुल का एप्रोच रोड बारिश के तेज दबाव के चलते नीचे बैठ गया है। सड़क पर जगह-जगह चौड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 100 मीटर सड़क का हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नीचे की मिट्टी लगातार बह रही है, जिससे सड़क का ढांचा बेहद कमजोर हो चुका है।
एक तरफ आसमान से लगातार बरसता पानी तो दूसरी तरफ उफान पर बहती बागेन नदी। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और बहाव इतना तेज है कि एप्रोच के और ज्यादा कटने का खतरा मंडरा रहा है। इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर वक्त रहते इसे नहीं संभाला गया, तो चित्रकूट और मिर्जापुर को जोड़ने वाला यह अहम संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।
इस खतरे के बीच सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक सड़क की मरम्मत का तीन साल का ठेका था, जिसकी अवधि अब पूरी हो चुकी है। ठेका खत्म होते ही सड़क का इस तरह धंस जाना कई सवाल खड़े करता है। क्या मरम्मत के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था? क्या पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभागों ने नियमित तकनीकी ऑडिट किया था? और अगर निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?*
लगातार बारिश के चलते बदौसा बागेन नदी पुल का एप्रोच खराब हुआ है। उसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई है। एहतियातन रूट डायवर्ट किया गया है। साथ ही दूसरे पुल का टेंडर भी पास हो चुका है, जिसका निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
बदौसा बागेन नदी पुल के पास मरम्मत कार्य चल रहा है, जिसके चलते रूट डायवर्ट किया गया है। चित्रकूट से आने वाले सभी भारी वाहनों को रोक दिया गया है। उन्हें बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और राजापुर-कमासिन मार्ग से निकाला जा रहा है।
प्रशासन के सामने इस वक्त दोहरी चुनौती है। पहली, उफनती नदी के बीच इस एप्रोच रोड को कटने से बचाना और दूसरी, वैकल्पिक मार्गों पर ट्रैफिक को सुचारू रखना। मरम्मत का काम शुरू जरूर हो गया है, लेकिन बारिश अगर यूं ही जारी रही तो खतरा और बढ़ सकता है। तात्कालिक राहत के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि इस पूरे निर्माण और मरम्मत कार्य की निष्पक्ष जांच हो, ताकि जनता के पैसों और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई तय हो सके।
✍️Sandeep
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