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मायावती ने किया एक तीर से तीन काम; कांशीराम की विचारधारा की रक्षा, परिवारवाद से दूरी और अनुशासन का पाठ

UP News : बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद को लेकर दिए बयान से जहां एक तरफ मान्यवर कांशीराम के विचारों की रक्षा की है।✍️Anil Shahi

By HO BUREAU 

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UP News : बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद को लेकर दिए बयान से जहां एक तरफ मान्यवर कांशीराम के विचारों की रक्षा की है तो दूसरी तरफ परिवारवाद से दूरी बनाकर पार्टी में अनुशासन कायम रखने का बड़ा संदेश दिया है। फिलहाल उत्तराधिकार का मामला अभी आधार में लटक गया है। यानि कि मायावती ने एक तीर से तीन काम किया है। साथ ही राजनीति के आधुनिक तत्वों पर बात कर बसपा की पूरी राजनीति की दिशा के बारे में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

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बसपा प्रमुख मायावती द्वारा कहे गए शब्दों पर गौर कीजिए “कांशीराम जी ने परिवार को पार्टी कार्य की छूट दी थी, चुनाव लड़ाने या पद देने के खिलाफ थे”। इस एक संदेश से मायावती ने सीधे तौर पर खुद को कांशीराम की वैचारिक विरासत से जोड़ा है। आनंद को लेकर मायावती ने खुद कहा है कि “पार्टी में कार्य करने की इजाजत दी है”।

मतलब निष्कासन खत्म हुआ है लेकिन पूर्ण बहाली अभी नहीं हुई है। इसका मतलब है वो कार्यकर्ता के तौर पर कार्य करेंगे, नेता के तौर पर नहीं। बैठक में उनके द्वारा “विरोधियों के हथकंडों से बचने के लिए समय की जरूरत” वाला बयान विरोधियों का मुंह बंद करने लेकर है जो कि परिवारवाद से पार्टी को दूर रखने की वकालत है। इन तीन संदेशों के जरिए मायावती ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत देते हुए ये स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल पार्टी में वही सर्वेसर्वा हैं कोई और उत्तराधिकारी नहीं है। उत्तराधिकार के लिए अभी सही वक्त नहीं आया है। इसके लिए राजनैतिक परिपक्वता की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती ने जो बयान दिए उसके कई अहम मायने हैं। पहला है आकाश की वापसी, लेकिन पावर अभी हाफ रहेगा, कार्यकर्ता के तौर काम देखेंगे परंतु बड़े निर्णय नहीं ले सकेंगे। मार्च 2025 में आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटाने और पार्टी से निष्कासित करने के बाद ये पहला मौका है जब मायावती ने खुद कहा है कि “पार्टी में कार्य करने की इजाजत दी है”। मतलब निष्कासन खत्म हुआ है लेकिन पूर्ण बहाली नहीं हुई है। 2024 में आकाश के निष्कासन के समय भी मायावती ने यही तर्क दिया था “पूर्ण परिपक्वता आने तक अहम जिम्मेदारियों से अलग किया जा रहा है”।

आगामी 2027 यूपी चुनाव से पहले अपने बयान के जरिए मायावती ने विरोधियों को करता जवाब दिया है। बसपा पर भी गाहे-बगाहे परिवारवाद का हमला होता रहा है। कभी आनंद कुमार को लेकर तो कभी आकाश आनंद को लेकर बीजेपी और सपा दोनों घेरते रहे हैं। मायावती ने मान्यवर कांशीराम की विचारधारा का नाम लेकर ये नैरेटिव तोड़ने की कोशिश की है। संदेश साफ है कि भाई आनंद कुमार और भतीजा आकाश पार्टी में हैं, लेकिन टिकट और सत्ता में हिस्सेदारी का हक नहीं है।

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आज के दौर की राजनीति में साम, दाम, दंड, भेद सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं। बैठक में मायावती का ये कहना “विरोधियों के हथकंडों से बचने के लिए समय की जरूरत” बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसका मतलब मायावती मान रही हैं कि आकाश के बयानों, उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के गुटबाजी के आरोपों के कारण पार्टी को नुकसान हुआ। उन्हें अभी फ्रंट पर लाने से एजेंसियों, FIR और मीडिया ट्रायल का भी खतरा है। इससे विरोधियों के हथकंडों से बचने की नसीहत दी है। मतलब साफ है राजनीति के आधुनिक तत्वों का उपयोग भी किया जाना चाहिए।

मायावती ने अपने संबोधन के जरिये ये भी एक दम साफ कर दिया किया कि पार्टी में उत्तराधिकार का मामला अभी भी अधर में ही है, इसके लिए फिलहाल उचित समय नहीं है। बता दें कि मायावती ने जून 2024 में आकाश को फिर से उत्तराधिकारी बनाया था। लेकिन इस बार उन्होंने जानबूझकर “बड़ी जिम्मेवारी देना उचित नहीं होगा” ये कहकर स्पष्ट कर दिया कि बसपा में सेकंड लाइन लीडरशिप का संकट जारी रहेगा। सही समय आने पर ही पार्टी में सेकेंड लाइन को अधिकार दिए जाएंगे या फिर पार्टी का कोई नया उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा।

कुल मिलाकर मायावती ने एक तीर से तीन काम किए हैं जिसका जिक्र मैंने पहले किया है। पहला कांशीराम की विचारधारा की रक्षा की है। दूसरा परिवार को कंट्रोल में रखते हुए पार्टी को परिवारवाद के आरोपों से बचाए रखा है और तीसरे कार्यकर्ताओं और नेताओं को अनुशासन में रहने का सबसे बड़ा संदेश दिया है। इसके साथ ही मायावती ने पहली बार ये बात मानी है कि राजनीति के आधुनिक तत्वों सम, दाम, दंड और भेद का समानुसार उपयोग किया जाना भी जरूरी है।

✍️Anil Shahi

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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