Delhi : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।✍️अरविंद कुमार
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Delhi : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी पूरे देश में आंदोलन शुरू करेगी। इसके बाद दिल्ली में जंतर-मंतर 2.0 अभियान चलाने की भी बात कही गई है।
अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार है, लेकिन मतदाता सूची में बदलाव और वोट से जुड़े विवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
दीपके ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि बीजेपी के 240 सीटों पर सिमटने के बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया और इसके बाद कई राज्यों में विपक्षी दलों को कमजोर किया गया। उन्होंने पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दूसरे राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी आरोप लगाए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CJP ने साफ किया है कि उसकी मुख्य मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं हुआ तो पार्टी पीछे नहीं हटेगी और देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘जंतर-मंतर 2.0’ अभियान चलाने का भी ऐलान किया गया है।
दीपके ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आम नागरिक के पास बदलाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण अधिकार उसका वोट है। अगर किसी व्यक्ति को अपने वोट को लेकर ही भरोसा नहीं रहेगा, तो वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद कैसे करेगा।
दास ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का जिक्र करते हुए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन मुद्दों पर देश में गंभीर चर्चा की जरूरत है।
CJP के दूसरे सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने पार्टी के अभियान को समर्थन देते हुए कहा कि चुनाव व्यवस्था में मतदाताओं का भरोसा सबसे अहम है।
CJP की ओर से कहा गया कि पार्टी का आंदोलन केवल किसी एक राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर है।
वहीं, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर आयोग ने कहा है कि किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, SIR समेत उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में अब CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद यह देखना अहम होगा कि उसका अगला कदम क्या होता है और चुनाव आयोग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
✍️अरविंद कुमार
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