दिल्ली सरकार ने 17 साल पुराने बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा में निरसन विधेयक पेश किया है।✍️ अरविंद कुमार
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नई दिल्ली| 11 अगस्त 2026 दिल्ली सरकार ने 17 साल पुराने बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा में निरसन विधेयक पेश किया है। सरकार का कहना है कि पुराने कानून की जगह जल्द सरल और प्रभावी नई नीति लाई जाएगी।
राजधानी दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) प्रतिष्ठानों से जुड़ा करीब 17 साल पुराना कानून अब खत्म होने जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा में दिल्ली शयन कक्ष तथा भोजन संस्थापना (निरसन) अधिनियम, 2026 विधेयक पेश किया है। इसके जरिए 2007 में लागू किए गए बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून को निरस्त करने का प्रस्ताव है।
विधेयक में 2007 के मूल कानून के साथ बाद में किए गए 2009 और 2021 के संशोधनों को भी खत्म करने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि पुराने कानून की जगह जल्द एक अधिक सरल, व्यावहारिक और प्रभावी नई नीति लागू की जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नई नीति लागू होने तक बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के नए रजिस्ट्रेशन नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी फिलहाल स्थगित रहेगी।
हालांकि, मौजूदा बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों को तत्काल बंद नहीं किया जाएगा। दिल्ली में मौजूदा योजना के तहत संचालित करीब 750 प्रतिष्ठान अपने मौजूदा लाइसेंस की वैधता समाप्त होने तक संचालन जारी रख सकेंगे।
सरकार ने साफ किया है कि पुराने कानून को निरस्त करने का मतलब यह नहीं है कि बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों पर सभी नियम खत्म हो जाएंगे। फायर सेफ्टी, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नगर निगम के नियम और कानून-व्यवस्था से जुड़े मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे।
नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकेंगे। सरकार की ओर से यह कदम नियमों को आसान बनाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। यह फैसला मालवीय नगर में हुई आग की घटना के बाद और अहम माना जा रहा है।
दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना वर्ष 2007 में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। खासतौर पर 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान राजधानी में पर्यटकों के लिए होटल कमरों की संभावित कमी को देखते हुए इस योजना को बढ़ावा दिया गया था।
योजना के तहत लोगों को अपने घरों में पर्यटकों के ठहरने की सुविधा देने की अनुमति थी। इसके लिए एक घर में कम से कम एक और अधिकतम छह कमरे पर्यटकों को किराए पर देने का प्रावधान किया गया था।
निरसन विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कानून खत्म होने के बाद पुराने पंजीकरण, प्रमाण पत्र, आदेश, स्वीकृतियां और पहले से शुरू की गई कानूनी कार्यवाहियां अपने आप खत्म नहीं होंगी। पुराने कानून के तहत अर्जित अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व और देनदारियां भी प्रभावित नहीं होंगी।
विधेयक में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 की धारा 6 के प्रावधान लागू रखने की बात कही गई है। यानी पुराने कानून से जुड़े अधिकारों और कानूनी मामलों की निरंतरता बनी रहेगी।
अब विधेयक को विधानसभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके पारित होने और सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद 2007 की पुरानी कानूनी व्यवस्था औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगी।
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✍️ अरविंद कुमार, दिल्ली ब्यूरो
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