Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद के साथ करीब 10 घंटे मंथन किया।✍️अरविंद कुमार
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Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद के साथ करीब 10 घंटे मंथन किया। दो दिन चले चिंतन शिविर में सरकार के कामकाज, योजनाओं की डिलीवरी, प्रशासनिक सुधार और अगले चरण की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। पहले दिन करीब साढ़े चार घंटे तक मंथन चला और प्रधानमंत्री मोदी आठ समूहों में पहुंचे। मंत्रियों से उनके कामकाज का फीडबैक लिया और आगे की दिशा को लेकर सुझाव दिए।
इस बार चिंतन शिविर में Gen Z और युवाओं पर खास फोकस रहा। प्रधानमंत्री मोदी का जोर इस बात पर रहा कि विकसित भारत 2047 सिर्फ सरकार का अभियान न रहे, बल्कि युवाओं की भागीदारी वाला बड़ा मिशन बने। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के जरिए युवाओं को इससे जोड़ने पर जोर दिया गया।
Gen Z के लिए डिजिटल माध्यम सूचना का बड़ा जरिया है। ऐसे में सरकार के लिए चुनौती यह भी है कि उसकी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक उनकी भाषा और उनके पसंदीदा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचे। यही वजह है कि प्रभावी संचार को भी मंथन का हिस्सा बनाया गया।
युवा एजेंडे के साथ रोजगार सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा। प्रधानमंत्री मोदी का जोर योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का लाभ युवाओं तक पहुंचाने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने पर रहा।
20वें रोजगार मेले में हाल ही में 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। सरकार के मुताबिक रोजगार मेलों के जरिए अब तक करीब 12.75 लाख नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। ऐसे में रोजगार, कौशल और अवसर को ‘विकसित भारत’ की युवा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। उनका जोर सिर्फ योजनाएं बनाने के बजाय उनकी जमीन पर प्रभावी डिलीवरी पर रहा। जन विश्वास से जन आधार के तहत सरकार और जनता के बीच भरोसा मजबूत करने, सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई।
चिंतन शिविर में मंत्रियों ने अपने मंत्रालयों की उपलब्धियों और आगे की योजनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। यानी फोकस केवल यह जानने पर नहीं रहा कि किस मंत्रालय ने क्या किया, बल्कि इस पर भी रहा कि अगले चरण में काम को और तेज और प्रभावी कैसे बनाया जाए।
चिंतन शिविर के साथ ही कैबिनेट फेरबदल की चर्चा भी तेज हो गई है। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और अगले चरण की प्राथमिकताओं को लेकर हुए मंथन के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ मंत्रियों के प्रभार बदले जा सकते हैं? क्या किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी बदलेगी? क्या कुछ मंत्रियों को नई जिम्मेदारी मिलेगी? या मौजूदा प्रभारों में ही बदलाव होगा? इन सवालों पर अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
सरकार ने फिलहाल कैबिनेट फेरबदल या प्रभार बदलने की कोई घोषणा नहीं की है। इसलिए इसे अभी अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। हालांकि, चिंतन शिविर में मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा के बाद इस चर्चा ने जरूर जोर पकड़ा है।
मंथन का अगला दौर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को प्रस्तावित है। यानी सरकार की समीक्षा प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। अगले दौर में बाकी प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।
अब निगाह इस बात पर है कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुए इस व्यापक मंथन से सरकार की आगामी रणनीति में क्या बदलाव सामने आते हैं और क्या इसका असर मंत्रियों के प्रभार पर भी दिखाई देता है।
2021 में हुए चिंतन शिविरों में शासन, नीति निर्माण, कार्यकुशलता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर था। 2026 में फोकस इससे आगे बढ़कर Gen Z, रोजगार, युवा भागीदारी, जनविश्वास, प्रभावी संचार और विकसित भारत 2047 तक पहुंच गया है। यानी इस बार सवाल सिर्फ सरकार ने अब तक क्या किया, इसका नहीं है। सवाल यह भी है कि अगले चरण में सरकार युवाओं की उम्मीदों, रोजगार और बदलते डिजिटल दौर के साथ अपनी नीतियों को किस तरह आगे ले जाएगी।
✍️अरविंद कुमार
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