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पटना में 5 नवंबर से सजेगा ‘जुगनू हाट’, बिहार की कला और हस्तशिल्प को मिलेगा खास मंच

HO BUREAU

इस आयोजन के जरिए बिहार की लोक परंपराओं और पारंपरिक शिल्पकला को लोगों के सामने लाने की तैयारी है। जुगनू हाट में मगही लोक संगीत और लोकप्रिय जट-जटिन नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। वहीं, टेराकोटा, दोसूती और पेपरमाशे से तैयार कलाकृतियों के माध्यम से बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलेगी।

पटना में 5 नवंबर से सजेगा ‘जुगनू हाट’, बिहार की कला और हस्तशिल्प को मिलेगा खास मंच
'Jugnu Haat' to be held in Patna starting November 5; a special platform for Bihar's art and handicrafts.
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पटना। बिहार की पारंपरिक कला, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और बुनकरी को प्रोत्साहित करने के लिए पटना में तीन दिवसीय ‘जुगनू हाट’ आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन 5 से 7 नवंबर 2026 तक बापू टावर, गर्दनीबाग में होगा। मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से प्रस्तुत इस हाट में राज्य की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों की कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस आयोजन के जरिए बिहार की लोक परंपराओं और पारंपरिक शिल्पकला को लोगों के सामने लाने की तैयारी है। जुगनू हाट में मगही लोक संगीत और लोकप्रिय जट-जटिन नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। वहीं, टेराकोटा, दोसूती और पेपरमाशे से तैयार कलाकृतियों के माध्यम से बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलेगी।

बुनकरी की समृद्ध परंपरा को भी इस आयोजन में खास जगह दी गई है। यहां बिहार की प्रसिद्ध 52 बूटी और भागलपुरी टसर के उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही क्रोशिया और एप्लिक कला पर आधारित विशेष वर्कशॉप भी आयोजित होंगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को पारंपरिक कलाओं की बारीकियों को जानने और उन्हें सीखने का अवसर मिलेगा।

डॉ. स्मृति पासवान ने आयोजन को लेकर कहा, “जुगनू हाट सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बिहार की कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को सम्मान देने की एक पहल है। स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और बुनकरों ने अपने हुनर, मेहनत और रचनात्मकता से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को कायम रखा है। ऐसे आयोजन उन्हें अपनी कला और उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी मददगार साबित होते हैं। हमारा प्रयास है कि स्थानीय कला और कलाकारों को प्रोत्साहन मिले तथा बिहार की सांस्कृतिक पहचान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।”

आयोजकों ने प्रदेश के लोगों और कला-संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोगों से इस आयोजन में भाग लेने की अपील की है। उनका मानना है कि आम लोगों की भागीदारी से स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और बुनकरों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, बिहार की पारंपरिक कलाओं को संरक्षित रखने और उन्हें नई पहचान दिलाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

  • आयोजन का नाम: जुगनू हाट
  • आयोजन की तारीख: 5, 6 और 7 नवंबर 2026
  • प्रस्तुतकर्ता: मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
  • आयोजन स्थल: बापू टावर, गर्दनीबाग, पटना
  • मुख्य आकर्षण: मगही लोक संगीत, जट-जटिन नृत्य, टेराकोटा, दोसूती, पेपरमाशे, 52 बूटी, भागलपुरी टसर, क्रोशिया और एप्लिक कला की वर्कशॉप।

✍️Satyam Kushwah

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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