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यूपीः मां विंध्यवासिनी धाम में भिड़े पुलिस और पंडा, समाज के सदस्य को दर्शन करने से रोकने पर बिगड़ा मामला

माता विंध्यवासिनी के धाम में शुक्रवार की रात पंडा समाज को जबरन धक्का देकर हटाए जाने से मामला बिगड़ गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने किसी प्रकार मामला शांत कराया। पुलिस पर परम्परा के विपरीत कार्य किए जाने का आरोप लगाया गया है। परंपरा के अनुसार मां के धाम में पहुंचे पंडा समाज के सदस्य मंदिर पर जाने के बाद सबसे पहले माता विंध्यवासिनी का दर्शन करते हैं।

By Rakesh 

Updated Date

मिर्जापुर। माता विंध्यवासिनी के धाम में शुक्रवार की रात पंडा समाज को जबरन धक्का देकर हटाए जाने से मामला बिगड़ गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने किसी प्रकार मामला शांत कराया। पुलिस पर परम्परा के विपरीत कार्य किए जाने का आरोप लगाया गया है।

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परंपरा के अनुसार मां के धाम में पहुंचे पंडा समाज के सदस्य मंदिर पर जाने के बाद सबसे पहले माता विंध्यवासिनी का दर्शन करते हैं। इसके बाद ही भक्तों को दर्शन पूजन करने में सहायक बनते हैं। पंडा समाज के सदस्यों को किसी भी द्वार से प्रवेश कर अकेले दर्शन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जिसका समाज के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी अनुपालन कर रहे हैं।

निकास द्वार पर ही पंडा समाज के लोगों ने एकजुट होकर जताया आक्रोश

इसी क्रम में शुक्रवार की रात पंडा समाज के कुछ सदस्य मंदिर पर जाने के बाद दर्शन करने के लिए द्वार पर पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया। इतना ही नहीं जबरन धक्का देकर दरवाजे से हटा दिया गया। इसी दौरान पंडा समाज के सदस्य अवनीश मिश्र भी मां के दर पर हाजिरी लगाने पहुंचे। उनके साथ भी तैनात पुलिस कर्मियों ने अभद्रता किया। उन्हें भी दर्शन करने से रोक दिया गया। निकास द्वार पर ही पंडा समाज के लोग एकजुट हो गए।

किसी तरह परंपरा तोड़कर रोके जाने से नाराज लोगों को मनाया 

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मामले की जानकारी मिलते ही धाम प्रभारी सीपी पांडेय दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। किसी प्रकार परंपरा तोड़कर रोके जाने से नाराज लोगों को मनाया गया। माता विंध्यवासिनी के धाम में नवरात्रि मेला के दौरान आसपास के जनपदों से हजारों सुरक्षा कर्मियों को सुरक्षा के नाम पर तैनात किया जाता हैं।

मंदिर की व्यवस्था से अनभिज्ञ कर्मियों द्वारा हुक्म की तालीम करने में परंपरा को भी दरकिनार कर दिया जाता है। जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश भड़क जाता हैं। धाम प्रभारी सीपी पांडेय ने बताया कि यजमान को निकास द्वार से ले जाने पर रोका गया था। मेला के दौरान भीड़ को देखते हुए व्यवस्था के लिए कदम उठाया गया था। वार्ता के साथ ही मामला सुलझा लिया गया है।

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