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Ranchi Violence : उपद्रव के चलते रांची के व्यापार करीब 500 करोड़ का नुकसान, सरकार को 75 करोड़ राजस्व का हुआ घाटा

Jharkhand News : उपद्रव के बाद से ही रांची का व्यापार लगभग बंद है. 36 घंटों के बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल हुई लेकिन इस वजह से प्रदेश को करीब 500 करोड़ के नुकसान हो चुका है. वहीं राज्य की सरकार को इस उपद्रव की वजह से करीब 75 करोड़ राजस्व की हानि झेलनी पड़ेगी।

By इंडिया वॉइस 
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Ranchi Business affect by violence : रांची उपद्रव के बाद से ही लोगों को खासी समस्या का सामना करना पड़ा है. 36 घंटो तक इंटरनेट सेवायें बंद रहने से जनजीवन अयस्त व्यस्त रहा. बंद का सीधा असर लोगो के व्यापार में देखने को मिला। इंटरनेट की वजह से लगभग सभी व्यापारिक प्रतिस्ठान ठप रहे. कोरोना के बाद ये पहला मामला है जब लोगो को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. एक अनुमान के अनुसार एक दिन इंटरनेट न चलने की वजह से करीब 500 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है. ये नुकसान केवल निजी व्यापारियों का ही नहीं हुआ, बल्कि इससे राज्य सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है.

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क्या हैं इस नुकसान की वजह

शुक्रवार को कुछ असामाजिक तत्वों के कारण रांची में उपद्रव हुआ. जिसके बाद से ही इंटरनेट सेवाओं को लोगो की सुरक्षा के चलते बंद कर दिया गया. इस वजह से रांची के व्यापारी परेशान रहे. इस समय शादियों का सीजन चल रहा है ऐसे में कपडे और सोने चांदी की बिक्री में तेजी चल रही थी. लेकिन हिंसा के बाद से ही इंटरनेट व अन्य सेवाएं बंद कर दी गयी हैं. जिससे लोगो को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष धीरज तनेजा ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए कहा कि इस अप्रत्याशित बंद ने रांची शहर के लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये के व्यवसाय को धराशायी किया है. रांची शहर से हर दिन व्यवसाय के विभिन्न सेग्मेंट से लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इस बंदी की वजह से यह सीधा प्रभावित हुआ है.

सरकार को भी झेलना पड़ा नुकसान

उप्रदवियों की हिंसा की वजह से बंद व्यापार का असर व्यापारियों के साथ साथ राज्य की सरकार को भी करोड़ों का नुकसान हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक 20 से 22 करोड़ का कारोबार केवल रांची के अपर बाजार से होता है. ठीक इसी तरह पेट्रोल, सोना और चांदी से भी हर दिन करीब 20 से 25 करोड़ का कारोबार होता है. यदि रांची से हर दिन लगभग 500 करोड़ के व्यापर का अनुमान लगाया जाये तो उसका 15 प्रतिशत औसतन 75 करोड़ बैठता हैं. इस तरह से झारखण्ड सरकार को सीधे तौर पर करीब 75 करोड़ राजस्व का नुकसान हुआ है

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