Delhi : सत्य निकेतन पीजी हादसे में जान गंवाने वाले पांचों छात्र अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना लेकर आए थे।✍️अरविंद कुमार
Updated Date
Delhi : सत्य निकेतन पीजी हादसे में जान गंवाने वाले पांचों छात्र अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना लेकर आए थे। किसी ने रक्षाबंधन परिवार के साथ मनाया और फिर दिल्ली लौटा, तो किसी की जिंदगी महज 17 साल की उम्र में थम गई। हादसे ने पांच परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
दिल्ली में पढ़ाई कर अपना भविष्य संवारने का सपना लेकर आए पांच युवाओं की जिंदगी सत्य निकेतन की ढही इमारत के मलबे में हमेशा के लिए दब गई। ये छात्र अलग-अलग राज्यों से राजधानी आए थे। उनके परिवारों ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कई सपने संजोए थे। कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहता था, तो कोई पढ़ाई पूरी कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था। लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने इन सपनों को अधूरा छोड़ दिया।
20 वर्षीय अभिषेक कुमार उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के रहने वाले थे। वह पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होगा और बेहतर भविष्य बनाएगा। लेकिन सत्य निकेतन हादसा अभिषेक के परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा बन गया।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले 20 वर्षीय युवराज सोनी मोतीलाल नेहरू कॉलेज से जुड़े छात्र थे। उनका सपना चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का था। युवराज अपने पिता कन्हैया लाल सोनी के इकलौते बेटे थे और उनकी एक छोटी बहन है। परिवार के मुताबिक, युवराज रक्षाबंधन मनाने के लिए घर गए थे। परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद वह पढ़ाई के लिए दिल्ली लौटे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि दिल्ली लौटने के बाद युवराज दोबारा अपने घर नहीं पहुंच पाएंगे।
उत्तर प्रदेश के औरैया के रहने वाले 17 वर्षीय पवन भी इस हादसे का शिकार हुए। जिस उम्र में एक युवा अपने भविष्य की नींव रखता है, उस उम्र में पवन पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे। परिवार ने उनके भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे, लेकिन हादसे ने उन सपनों को एक झटके में तोड़ दिया।
19 वर्षीय अर्पित जहाज मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले थे। हादसे के बाद परिवार के लिए सबसे मुश्किल वक्त वह था, जब अर्पित के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। उनकी बहन पुष्पा अस्पताल पहुंचीं और पहचान-चिह्न के जरिए अपने भाई के शव की पहचान की। जिस भाई को परिवार बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली भेज रहा था, उसकी पहचान बहन को अस्पताल में शव के रूप में करनी पड़ी। यह परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं था।
मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले 18 वर्षीय अक्षत सिंह यादव भी हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में शामिल थे। अक्षत पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह पढ़ाई पूरी कर अपने भविष्य को नई दिशा देंगे और जीवन में आगे बढ़ेंगे। लेकिन सत्य निकेतन हादसे ने महज 18 साल की उम्र में उनकी जिंदगी का सफर खत्म कर दिया।
सत्य निकेतन हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई। इनमें पांच छात्र, 75 वर्षीय सुरिंदर सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। पांच छात्रों की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। साथ ही इस हादसे ने दिल्ली में छात्र आवास और पीजी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ये पांचों युवा दिल्ली अपने परिवारों से दूर बेहतर कल की तलाश में आए थे। किसी ने अपने करियर में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखा था, तो किसी के परिवार ने बेटे को कामयाब होते देखने की उम्मीद लगा रखी थी। लेकिन जिस शहर में वे अपने सपने पूरे करने आए थे, वहीं एक इमारत का मलबा उनके सपनों के साथ उनकी जिंदगी भी छीन ले गया।
✍️अरविंद कुमार
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।