Banda : उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा से ही कानून-व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा रही है, लेकिन जनपद बांदा के हालिया पुलिस आंकड़े हकीकत बयां कर रहे हैं।✍️Sandeep
Updated Date
Banda : उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा से ही कानून-व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा रही है, लेकिन जनपद बांदा के हालिया पुलिस आंकड़े हकीकत बयां कर रहे हैं। वर्ष 2012 से 2017 के अखिलेश सरकार और 2017 से 2022 के योगी सरकार के पांच-पांच वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ है कि जनपद में हर श्रेणी के अपराधों में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है। अपराधियों में कानून का खौफ और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का सीधा असर जमीन पर नजर आने लगा है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अखिलेश सरकार के कार्यकाल में जहां बांदा में डकैती की घटनाएं आम थीं वहीं योगी सरकार के दौरान डकैती का आंकड़ा घटकर शून्य हो गया है। इसके अलावा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या रहे बलवा के मामलों में भारी गिरावट आई है। अखिलेश राज के 285 दंगों के मुकाबले योगी राज में यह संख्या महज 113 रह गई है यानी दंगों में 172 मामलों की रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई। प्रशासन का मानना है कि दंगाइयों से संपत्ति वसूली कानून और त्वरित पुलिस एक्शन के कारण उपद्रवियों पर नकेल कसी गई है।
महिला सुरक्षा के दावों को जमीनी हकीकत में बदलते हुए मिशन शक्ति और एंटी रोमियो स्क्वाड ने बांदा में असर दिखाया है। बलात्कार के मामले 216 से घटकर 163 रह गए हैं। वहीं बाल विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर बालिका अपहरण में 28 और बालक अपहरण में 3 मामलों की कमी आई है।
वहीं सड़क से लेकर मोहल्लों तक सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद हुई है। लूट के मामलों में 19 और चोरी की वारदातों में 208 घटनाओं की कमी आई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संगठित माफियाओं के खिलाफ चलाए गए कड़े अभियानों और फास्ट ट्रैक कोर्ट की सक्रियता से अपराधियों में डर पैदा हुआ है। हत्या के मामले भी 197 से घटकर 171 और हत्या के प्रयास 177 से घटकर 142 रह गए हैं।
लोगों का मानना है कि कानून-व्यवस्था में आए इस सुधार का सीधा असर आम जनता के जीवन स्तर और उनके रुझान पर पड़ रहा है। बांदा की जनता अब खुद को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित महसूस कर रही है जो विकास और शांति के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
✍️Sandeep
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।