नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026 में अमित शाह ने घुसपैठ, आतंकवाद और कट्टरपंथ पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सम्मेलन में साइबर अपराध, अवैध प्रवास और समुद्री सुरक्षा पर भी चर्चा होगी। ✍️ अरविंद कुमार
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नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026 में गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ, आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने MAC पर उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का AI आधारित विश्लेषण कर प्रभावी SOP तैयार करने, अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के साथ UAPA मामलों की जांच में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। सम्मेलन के दूसरे दिन हवाई खतरों, समुद्री सुरक्षा, सूचना युद्ध और जैव सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर मंथन होगा।
नई दिल्ली में नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026 का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ रोकने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-एजेंसी केंद्र यानी MAC के मंच पर उपलब्ध सूचनाओं का AI आधारित विश्लेषण किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी मानक संचालन प्रक्रियाएं यानी SOP तैयार करना है।
अमित शाह ने आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने गृह मंत्रालय की ‘प्रहार’ योजना के बेहतर क्रियान्वयन, सुरक्षा एजेंसियों के प्रशिक्षण और मामलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। भगोड़ों को वापस लाने और अनुपस्थिति में सुनवाई के प्रावधानों का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। यूएपीए मामलों की जांच में व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।
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सम्मेलन के पहले दिन आतंकवाद विरोधी चुनौतियों, खुफिया सूचनाओं के एकीकरण और विश्लेषण, मादक पदार्थों पर नियंत्रण, अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन तथा साइबर अपराध से निपटने के लिए नीतिगत ढांचे पर चर्चा हुई। पाकिस्तान के परोक्ष युद्ध से जुड़ी चुनौतियां भी चर्चा का प्रमुख विषय रहीं। उद्घाटन से पहले शाह ने शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद खुफिया अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी।
दो दिवसीय सम्मेलन हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित हो रहा है, जिसमें देशभर से 850 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं। दूसरे दिन हवाई प्रणालियों से उत्पन्न खतरों और उनके प्रतिकार, समुद्री अर्थव्यवस्था की सुरक्षा, सूचना युद्ध के प्रभाव और जैव सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य जमीनी स्तर के अधिकारियों के अनुभव और विशेषज्ञों की मदद से राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियों के समाधान तलाशना है।
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